बंजार (कुल्लू) । जिले के देवी-देवता पोष माह की संक्रांति बुधवार को स्वर्ग प्रवास के लिए निकल गए हैं। अब देवी-देवता एक से तीन माह बाद देवालय लौटेंगे। इस दौरान मंदिरों के कपाट दो माह के लिए बंद हो गए हैं। देवी-देवताओं के दवरथों की पूजा-अर्चना पर विराम लग गया है। हालांकि देवी-देवताओं के निशानों की पूजा पुजारी करेंगे।
इसके अलावा शादी-विवाह और अन्य शुभ कार्य पर एक माह तक विराम लग गया है। सभी देवी-देवता राजा इंद्र के दरबार में क्षेत्र की खुशहाली के लिए मंत्रणा करेंगे। प्रमुख देवता जहां करीब चार से पांच माह बाद अपने क्षेत्र को लौटेंगे, वहीं कुछ अन्य देवता एक से दो माह बाद स्वर्ग से वापस लौट आएंगे। हालांकि बंजार घाटी की पलाईच के आराध्य देवता गढ़पति ईश्वर महादेव पांच माह की लंबी तपस्या के बाद बाहर आएंगे।
देवताओं के पुजारी और कारकूनों ने सैकड़ों देवी-देवताओं को लाल वस्त्रों से ढक दिया है। अब मकर संक्रांति के दिन थोड़ी देर के लिए देव रथों से लाल कपड़ों को हटा दिया जाता हैं। जबकि कुछ देवी-देवताओं के कपाट फाल्गून की संक्रांति को खुलेंगे।
देवी देवता के कारकून विष्वा देव शर्मा, रोशन लाल शर्मा, चेतन शर्मा, टेढी सिंह नेगी, लीलाधर शर्मा, उत्तम शर्मा ने बताया कि पौष मास की संक्रांति पर देव रथों को ढक दिया गया। इस मौके पर देवी-देवताओं की मानसिक तौर पर पूजा अर्चना की जाती है। उक्त लोगों का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।