कुल्लू। सीपीआईएम के अधिवेशन में प्रदेश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर चर्चा की गई। संगठन को मजबूत बनाने के लिए 195 पार्टी सदस्यों ने अपने सुझाव साझा किए।
राज्य अधिवेशन में सर्वसम्मति से केंद्र और प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आठ प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें नव उदारवादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने पर रणनीति बनाई गई। इसके अलावा सीपीआईएम के सात सदस्यीय राज्य सचिव मंडल का गठन किया गया। जिसमें डॉ. ओंकार शाद, राकेश सिंघा, डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, प्रेम गौतम, कुशाल भारद्वाज और संजय चौहान शामिल हैं।
वहीं, राज्य अधिवेशन में 30 सदस्यीय राज्य कमेटी का गठन भी किया गया। इस कमेटी में उपरोक्त सात सदस्यों के अलावा विजेंद्र मेहरा, भूपेंद्र सिंह, सत्यवान पुंडीर, देवकीनंद, जगत राम, रविंद्र, नारायण सिंह, राजेंद्र चौहान, विश्वनाथ शर्मा, जयवंती, संतोष कपूर, होतम सोंखला, अशोक कटोच, राजेंद्र ठाकुर, मोहित वर्मा, जोगिंद्र सिंह, मोहिंद्र राणा, विजय शर्मा, केके राणा, सुदेश कुमारी, फालमा चौहान, नरेंद्र, सतपाल शामिल हैं। कमेटी में स्थायी आमंत्रित सदस्य के तौर पर राम सिंह को शामिल किया गया, जबकि कंट्रोल कमीशन में जगमोहन ठाकुर को अध्यक्ष और डॉ. रीना सिंह और प्रताप राणा को सदस्य बनाया गया। इस अधिवेशन में पार्टी के 23वें महासम्मेलन के लिए चार सदस्यों का चयन भी किया गया, जो प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उधर, पोलिट ब्यूरो सदस्य तपन सेन ने कहा कि देश में किसान-मजदूर एकता की संभावनाएं बन रही हैं। सरकार ने जिस तरीके से देश को निजी हाथों में बेचने का काम शुरू किया है। श्रम कानूनों में बदलाव से कामगारों के अधिकारों पर हमला किया गया है और किसानों की जमीन हथियाने के लिए कृषि कानून लाए गए हैं। आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त है। इस आर्थिक संकट में सीपीआईएम जनता के पक्ष में खड़ी है।