कुल्लू/खराहल। करीब दो महीने से पर्याप्त बारिश न होने से बागवानी पर भी असर पड़ने लगा हैं। विकसित हो रहे फलों के आकार पर प्रभाव पड़ रहा है। इससे फलों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
प्लम, आड़ू, खुमानी और बादाम अमूमन जून के पहले पखवाड़े में तैयार हो जाते हैं। इस बार मार्च और अप्रैल के महीने में बारिश नहीं होने से गुठलीदार फलों के आकार पर असर पड़ रहा है। ऐसे में बागवान फसल के प्रति काफी चिंतित हैं। बागवानों का कहना है एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो इन फलों को और नुकसान होगा।
इस बार जिले में प्लम की फसल पिछले साल की तुलना में कम है। जिले में बारह हजार हेक्टेयर में प्लम का उत्पादन हो रहा है। बता दें कि कई क्षेत्रों ओलो की वजह से भी फसल को नुकसान हुआ। बागवान अमित, कर्मचंद, ज्ञान ठाकुर, रविंद्र शर्मा, जयचंद, रोशन लाल, देवराज नेगी, प्रताप पठानिया, विजय पठानिया, कैलाश ठाकुर और चंदे राम ने कहा कि बारिश नहीं होने से बगीचों में नमी खत्म हो गई। इसका सीधा प्रभाव फलों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पौधों से कई फल पीले होकर नीचे गिर रहे हैं। समय पर बारिश नहीं हुई तो नुकसान और अधिक हो सकता है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू अध्यक्ष प्रेम शर्मा कहते हैं कि सूखे के कारण गुठलीदार फलों समेत सेब, नाशपाती को भी नुकसान हो रहा है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है वहां पौधों को पानी दें। असिंचित क्षेत्र में सूखे से तमाम फलों और एक से दो साल के पौधों को नुकसान हो रहा है। संवाद