दशहरा उत्सव में भाग लेने वाले जिला के आनी, निरमंड, बंजार और सैंज घाटी के करीब 125 देवी-देवता तीन किलोमीटर लंबी औट टनल से होकर नहीं गुजरेंगे। देवता अपने पुराने रास्ते लारजी-औट मार्ग से होकर ही कुल्लू दशहरा में भाग लेंगे। करीब तीन किलोमीटर लारजी-औट मार्ग की हालत का निरीक्षण मंत्री एवं दशहरा उत्सव समिति कुल्लू के अध्यक्ष कर्ण सिंह ने किया। उन्होंने यह निरीक्षण सोमवार शाम को सैंज घाटी के दौर के बाद वापस कुल्लू आते समय किया है। उन्होंने इस दौरान बदहाल रास्ते की दशा को सुधारने के लिए एनएच अथॉरिटी के अधिकारियों को निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव में आने वाले देवी-देवताओं का समिति देव परंपरा के अनुसार सम्मान करती है। ऐसे में दशहरा उत्सव में आने वाले देवी देवताओं व उनके देवलुओं को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े । जिला कुल्लू के आनी, बंजार, सैंज और निरमंड के करीब 125 देवी देवता दशहरा में भाग लेने आते हैं। और यह सभी देवता अपने सालों पुराने रूटों से आवाजाही करते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से लारजी डैम बनने से औट-लारजी की पुरानी सड़क डैम का बढ़े जलस्तर से दलदल में तबदील हो गई थी। कई जगहों से सड़क का नामोंनिशान भी मिट गया है, परंतु दशहरा के दौरान इस मार्ग को देवी देवताओं के आवागमन के लिए दुरुस्त किया जाता है। इसी के चलते मंत्री कर्ण सिंह ने इस मार्ग की निरीक्षण कर जायजा लिया। इधर, जिला देवी देवता कारदार संघ के सह सचिव एवं आनी खंड के प्रधान भागे राम राणा ने कहा कि दशहरा में भाग लेने वाले देवी देवता अपने पुराने रास्ते लारजी-औट मार्ग होकर कर आते हैं। देव परंपरा तथा सुरक्षा कारणों से देवी देवता टनल होकर आवाजाही नहीं करते हैं।