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देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में भरी हाजिरी

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कुल्लू। दशहरा उत्सव में ढालपुर पहुंचे सैकड़ों देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। रघुनाथ की नगरी सुल्तानपुर में शुक्रवार सुबह से देवी-देवताओं के आने का सिलसिला जारी रहा। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ से देवमिलन किया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की स्वर लहरियों से पूरी घाटी गूंज उठी। इसके बाद देवी-देवता राजमहल में भी राजपरिवार को आशीर्वाद देने गए।
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भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरने के बाद देवता अपने अस्थायी शिविरों में लौटे। गौर रहे कि पिछले साल कोरोना के चलते दशहरा सूक्ष्म रूप से मनाया गया। इसमें सिर्फ सात ही देवी-देवताओं को बुलाया गया था। इस बार सभी देवी-देवताओं ने दशहरा उत्सव में हाजिरी भरी। दो साल बाद घाटी के देवताओं ने भगवान रघुनाथ से देव मिलन किया। सैकड़ों देवी-देवताओं की उपस्थिति से कुल्लू घाटी देवलोक में तबदील हो गई है। कुल्लू का माहौल पूरी तरह से देवमयी हो गया है। हालांकि, देवी-देवताओं के इस भव्य देव मिलन का नजारा देखने के लिए कई राज्यों के पर्यटक भी कुल्लू पहुंचे हैं। कुल्लू दशहरा में इस बार 200 से अधिक देवी-देवताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। प्रशासन ने जिले के 392 देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र भेजे हैं। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि दशहरा के लिए आए देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। उन्होंने कहा कि देवता सात दिनों तक अपने अस्थायी शिविरों में ही रहेंगे।
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