तीर्थन घाटी में हूम पर्व गुशैनी के दौरान तीर्थन में शाही स्नान करतीं देवी गाड़ादुर्गा।
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गुशैणी (कुल्लू)। जिले की तीर्थन घाटी में देव संस्कृति और सभ्यता बहुत ही प्राचीन और समृद्ध है। यहां पूरे साल भर देवी-देवताओं के नाम पर मेले, त्यौहारों और धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता रहता है। सोमवार को घाटी की आराध्य देवी माता गाड़ा दुर्गा का हूम उत्सव देव परंपरा के अनुसार मनाया गया। देव संस्कृति का प्रगीत हूम उत्सव को देखने घाटी के लोगों के साथ पर्यटक भी उमड़े।
माता ने तीर्थन नदी में शाही स्नान किया। बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने माता का आशीर्वाद लिया। माता गाड़ा दुर्गा के पुजारी हरीश शर्मा ने बताया कि हर साल भादो माह में माता का हूम मनाया जाता है। माता का रथ पूरे लाव लश्कर व वाद्य यंत्रों की थाप पर देवालय से गुशैणी लाया गया और तीर्थन नदी की पवित्र जलधारा में शाही स्नान करवाया गया। बताया कि इतिहास के मुताबिक प्राचीन काल में माता एक कन्या रूप में अवतरित हुई थी और आज के दिन इसी स्थान पर तीर्थन नदी में छलांग लगाकर लुप्त हो गई थीं। इसके पश्चात माता शलवाड़ नामक स्थान पर एक मूर्ति के रूप में प्रकट हुईं थीं। माता ने गुशैणी में एक मंदिर निर्माण की बात कही थी और यहां पर मंदिर का निर्माण कर माता की प्रतिमा को स्थापित किया गया। कहा कि तीर्थन नदी को स्थानीय भाषा में गाड़ कहते हैं और इसी के चलते माता को गाड़ा दुर्गा के नाम से पूजा जाता है। कहा कि 40 वर्षों के बाद माता रथ में सवार होकर चिह्नित गांवों का दौरा करेंगी।