कुल्लू। कोरोना काल में विद्यार्थियों की परीक्षा करवाना संभव नहीं है। इसके चलते प्रदेश कैबिनेट ने भी स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षा निरस्त कर दी है। प्रदेश सरकार ने अभी तक 12वीं के विद्यार्थियों को प्रमोट करने का फैसला नहीं लिया है। सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर लाखों विद्यार्थियों को असमंजस में डाल दिया है। बिना परीक्षा दिए अंक कैसे मिलेंगे, इसकी चिंता विद्यार्थियों को सताने लगी है। विद्यार्थी रोविन, सुनील, अभय, सौरव, अभिमन्यु, गीतांजलि, शिवांगी, रोनिका, शीतल, प्रियांशी ने कहा कि शिक्षा बोर्ड और प्रदेश सरकार को विचार कर परीक्षा करवाने या विद्यार्थियों को प्रमोट करने पर सटीक निर्णय लेना चाहिए था, जिससे विद्यार्थियों को परेशान न होना पड़ता।
पूरे वर्ष की मेहनत हो गई बेकार
नेहा ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का फैसला विद्यार्थियों के हक में नहीं है। लेकिन विद्यार्थियों की पूरे वर्ष की मेहनत बेकार हुई है। एक वर्ष में विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत कर पढ़ाई की है। उस मेहनत का उन्हें लाभ नहीं मिल पाएगा। बिना परीक्षाओं के परिणाम निकालना सही नहीं है।
मेहनत के हिसाब से नहीं मिलेंगे अंक
तानिया ने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है। लेकिन परीक्षा न होने के चलते विद्यार्थियों को अंक किस आधार पर दिए जाएंगे। यह बात अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को उनकी मेहनत के हिसाब से अंक न मिलने की उम्मीद है।
मार्च-अप्रैल में होनी चाहिए थी परीक्षा
विजय ने कहा कि कोरोना संक्रमण अधिक बढ़ने से विद्यार्थियों की परीक्षा करवाना संभव नहीं है। लेकिन जब प्रदेश में मार्च, अप्रैल में कोरोना के मामले कम थे, उस दौरान बोर्ड की परीक्षा करवाई जा सकती थी। विद्यार्थियों को अब परीक्षाओं को लेकर परेशान न होना पड़ता।
पेपर रद्द करवाना रहा सही निर्णय
हेमलता ने कहा कि कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच पेपर न करवाना सही निर्णय है। परीक्षाएं होने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। विद्यार्थी संक्रमण की चपेट में न आए, इसके लिए परीक्षा रद्द की गई है। बिना परीक्षा के अंक कैसे मिलेंगे, इस बात पर विद्यार्थी असमंजस में है।
बार-बार बदलते निर्देशों से असमंजस
निवेदिता ने कहा कि बार-बार बदलते निर्देशों के कारण विद्यार्थी असमंजस में थे। कोरोना संक्रमण के बीच कब और कैसे स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षा लेगा, यह तय नहीं हो पा रहा था। परीक्षा निरस्त होने के उपरांत यह परेशानी दूर हुई है। बदलते निर्देशों से पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाए हैं।
विद्यार्थियों की सुरक्षा का रखा ध्यान
अरुण ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। संक्रमण के चलते परीक्षा करवाना विद्यार्थियों की सेहत के लिए घातक हो सकता था। परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना होता है। सफर के बीच वह लोगों के संपर्क में आने से संक्रमित हो सकते हैं।