कुल्लू। दो दिन से कुल्लू जिले में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी के बाद तापमान काफी लुढ़क गया है। ऐसे में प्लम की फसल पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। इन दिनों बगीचों में प्लम की सेटिंग चल रही है। ऐसे में प्लम की सेटिंग प्रभावित होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कुल्लू में करीब 2,500 हेक्टेयर भूमि पर प्लम की पैदावार हो रही है। लगातार बागवानों का प्लम के प्रति रुझान बढ़ रहा है। करीब डेढ़ माह से बारिश नहीं हुई थी। बगीचों में पर्याप्त नमी के लिए बारिश की जरूरत महसूस की जा रही थी।
बागवान देवी सिंह, नानक चंद, मेहर सिंह और डाबे राम ने कहा कि इन दिनों प्लम के पौधों में फूलों के साथ सेटिंग भी हो रही है। अधिक बारिश से फूलों में परागण धुल जाते हैं। हालांकि सबसे अधिक नुकसान ओलावृष्टि से होता है। ओले बागवानों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। मौसम साफ होने के बाद बागवानों को बारिश का फायदा मिलेगा।
सेब के पौधों में अधिक गर्मी के चलते, जो अर्ली फ्लावरिंग की संभावना नजर आ रही थी, वह अब नहीं होगी। पौधों में पर्याप्त नमी होगी, जिससे सेब में फ्लावरिंग भी समय पर होगी। इस संबंध में बागवानी विभाग के उप निदेशक राजकुमार ने कहा कि जिले में बारिश से किसान और बागवानों को राहत मिली है।