हेपेटाइटिस दिवस कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पर पशिक्षु को सम्मालित करते स्वास्थ्य विभाग व आईटी
कुल्लू। बरसात में लोगों के हेपेटाइटिस बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी की चपेट में आने से बचने के लिए तीन बातों का ध्यान अवश्य रखें। पेयजल साफ होने के अलावा हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। हेपेटाइटिस के लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में आएं। यह बात स्वास्थ्य विभाग की जन शिक्षा एवं संप्रेक्षण अधिकारी निर्मला महंत ने कही। विभाग ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) शमशी में मंंगलवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें प्रशिक्षुओं को हेपेटाइटिस के विकारों और बचाव संबंधी जानकारी दी गई।
जन शिक्षा एवं संप्रेक्षण अधिकारी निर्मला महंत ने कहा कि हेपेटाइटिस का मतलब लिवर की सूजन है। इस पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो कई तरह की गंभीर समस्याओं का जोखिम हो सकता है। हेपेटाइटिस की चपेट में न आएं, इसके लिए साफ पानी का ही सेवन करें। बरसात में पानी का दूषित होना एक आम समस्या है, जिससे हेपेटाइटिस हो सकता है।
उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं। हेपेटाइटिस ए और ई जैसे संक्रमण का मुख्य कारण अस्वच्छता को माना जाता है। खाने से पहले, शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद और संभावित रूप से दूषित सतहों को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। बार-बार मुंह को छूने से बचें। इस दौरान कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं ने नारा लेखन, भाषण प्रतियोगिता और चित्रकला के माध्यम से हेपेटाइटिस ए, बी,सी, डी और ई के लक्षण और बचाव बताए।