कुल्लू जिला में बर्फबारी के बाद ढके सेब के पेड।-संवाद
कुल्लू। सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध कुल्लू घाटी की बागवानी में बर्फबारी ने जान फूंक दी है। सेब की अर्ली वैरायटी के लिए 600 घंटों का चिलिंग आवर्स पूरा हो गया है। बर्फबारी के बाद जहां पूरे रात दिन तापमान काफी कम रहा वहीं सेब बेल्ट में बर्फबारी से पहले सुबह और शाम तापमान सात डिग्री से नीचे चल रहा था।
ऐसे में अर्ली वैरायटी सेब के लिए 600 घंटों का चिलिंग आवर्स पूरा हो गया है। रॉयल सेब वैरायटी के लिए चिलिंग आवर्स 1200-1600 घंटों का रहता है। यह लगभग 65 से 70 फीसदी तक पूरा हो गया है। बागवानी विभाग ने प्रारंभिक दौर में सेब की अच्छी फसल होने की उम्मीद जताई है। जिले में सेब का कारोबार करीब 1,000 करोड़ रुपये का है।
करीब 90 फीसदी परिवार बागवानी से जुड़े हैं। जिले में अक्तूबर से लेकर जनवरी तक सूखे जैसे हालात रहने से बागवानी पर संकट आ गया था। ऐसे में बागवानों को चिलिंग आवर्स के पूरा न होने की चिंता सता रही थी। चिलिंग आवर्स के लिए जो तापमान चाहिए था, वह नहीं मिल पा रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक चिलिंग आवर्स के लिए तापमान सात डिग्री से नीचे रहना चाहिए। जिले में चिलिंग आवर्स को पूरा होने का समय दिसंबर से लेकर फरवरी तक रहता है।
इसमें अर्ली वैरायटी के सेब में 600 घंटे और रॉयल सेब के लिए 1200 से 1600 घंटे तक सात डिग्री से नीचे तापमान की जरूरत रहती है। बागवानी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अर्ली वैरायटी के लिए जरूरी 600 घंटे का चिलिंग आवर्स का समय पूरा हो गया है। राॅयल प्रजाति के सेब के लिए लगभग 70 फीसदी तक चिलिंग आवर्स पूरा हुआ है। जिले में करीब 85 प्रतिशत सेब राॅयल प्रजाति का है। 15 फीसदी सेब अर्ली किस्मों का है।
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सेब के लिए अच्छी बर्फबारी हुई है और बगीचों में पर्याप्त नमी आ गई है। अर्ली वैरायटी सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स 600 घंटे पूरे हो गए हैं। रॉयल और अन्य किस्मों के सेब के लिए चिलिंग आवर्स भी 70 फीसदी तक पूरे हुए हैं। फरवरी अंत तक यह पूरा हो जाएगा। मौसम के अनुकूल रहने से सेब की अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है।
-डाॅ. बीएम चौहान, उपनिदेशक, बागवानी विभाग, कुल्लू