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यूक्रेन में कुक का काम करने पर हंगरी पहुंचाए भाई-बहन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुल्लू। यूक्रेन में फंसे कुल्लू के एक दर्जन विद्यार्थियों में से अभी तक चार विद्यार्थी अपने घर पहुंच गए हैं। अन्य विद्यार्थी यूक्रेन के विभिन्न- विभिन्न इलाकों में फंसे हुए हैं। उनको लेकर उनके परिजन खासे परेशान हैं। कुल्लू के भाई-बहन हंगरी के बॉर्डर पर पहुंच गए हैं।
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अब उन्हें यहां हवाई जहाज का इंतजार है। दोनों भाई-बहन को यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाने का लाभ मिला है। दो दिन तक भाई-बहन ने यूनिवर्सिटी की कैंटीन में कुक की कमी के चलते खाना बनाने का काम किया था। इस दौरान जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दोनों भाई-बहन को खाना बनाते हुए देखा तो उन्हें एक साथ हंगरी के बॉर्डर के लिए भेजा है। पिता विवेक गौतम ने कहा कि उनके बच्चों को कैंटीन में काम करने का फायदा मिला है। मनाली की छात्रा शुभ दर्शनी सोमवार शाम को हंगरी से दिल्ली पहुंच गई है, जो अपने भाई के साथ वोल्वो बस के जरिये अपने घर पहुंचेगी। कुल्लू के गांधीनगर की वंशिता भी सोमवार रात को दिल्ली से कुल्लू पहुंचेगी। वंशिता धीमान रविवार को रोमानिया से दिल्ली पहुंची थी। उधर, भुंतर और भट्टी कॉलोनी के दो छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हैं। यूक्रेन में फंसे होने से दोनों विद्यार्थियों के परिजन खासा परेशान हैं। भारत सरकार से जल्द से जल्द बाहर निकलने की गुहार लगाई है।
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