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बिना अनुमति चल रही हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी

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मणिकर्ण घाटी के छलाल क्षेत्र के चनाल में ट्रांसमिशन लाइन के लिए काटे गए देवदार के हरे पेड़। -संवा? - फोटो : Kullu
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुल्लू। मणिकर्ण घाटी में एचपीपीटीसीएल (हिमाचल प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड) ट्रांसमिशन लाइन बिछा रही है। इस काम में नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। बिना अनुमति जंगलों में पेड़ों का कटान हो रहा है। इसके विरोध में छलाल पंचायत जल्द उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगी। यह बात पंचायत प्रधान चुनी लाल ने कही।
उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। इसका मणिकर्ण घाटी की नौ पंचायतें लगातार विरोध कर रही हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन (1100) पर भी की गई है। आरटीआई के तहत जो दस्तावेज और जवाब मिले, उनमें साफ है कि घाटी की पंचायतों ने कार्य करने की अनुमति नहीं दी है। बावजूद इसके बेरोकटोक काम जारी है। पंचायत प्रधान ने कहा कि एफआरए कानून के तहत संबंधित ग्राम सभा में 50 फीसदी लोगों की अनुमति जरूरी है। इसमें भी 33 फीसदी महिलाएं शामिल होनी चाहिए। उसके उपरांत ही किसी कार्य को करने की अनुमति दी जाती है। यहां किसी भी पंचायत ने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित नहीं किया है। ऐसे में बिना अनुमति पेड़ों की बलि ट्रांसमिशन लाइन के नाम पर कैसे बलि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 19 फरवरी, 2020 में जनमंच में भी ग्रामीणों ने इस ट्रांसमिशन लाइन का विरोध किया था। अब तक छलाल पंचायत के अधिकार क्षेत्र में ही 100 से अधिक पेड़ों समेत पौधरोपण क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया है। इस दौरान राजेंद्र चौहान, संगत राम, डोले राम, नरेंद्र, हरिराम, ललित और ज्ञानचंद आदि उपस्थित रहे।
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ट्रांसमिशन लाइन से ये पंचायतें होंगी प्रभावित
मणिकर्ण घाटी की नौ पंचायतों में एचपीपीटीसीएल की ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। लाइन बिछने से बरशैणी, मणिकर्ण, कसोल, तलपिणी, पिणी, भेरण, चौंग, दनोगी और छेंऊर पंचायत में वन संपदा को नुकसान पहुंचेगा। इस कारण इन पंचायतों की हजारों की आबादी प्रभावित होगी।
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