मंडी में बागवानों के लिए पर्याप्त शौचालय नहीं हैं। एपीएमसी की ओर से बनाया गया शौचालय बंद है। इसके अलावा बैठने की स्थायी व्यवस्था न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज से आए बागवानों को घंटों खुले में इंतजार करना पड़ता है। मंडी क्षेत्र में आए दिन बिजली के अघोषित कट लग रहे हैं। अघोषित बिजली कटौती से आढ़तियों और कारोबारियों का काम प्रभावित होता है। पेयजल संकट भी हर सीजन में बना रहता है, जिसकी मांग वर्षों से उठ रही है।
वहीं, लूहरी से खेगसू मंडी तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क संकरी है। साथ ही कच्ची भी है। इस सड़क पर बड़े ट्राले और मालवाहक वाहनों को मंडी तक पहुंचने में कठिनाई होती है। संकरी सड़क होने से बड़े वाहनों के तिरपाल तक पेड़ों में फंस कर फट जाते हैं। सड़क पर हादसों का खतरा भी बना रहता है। कुल मिलाकर करोड़ों का कारोबार करने वाली खेगसू मंडी में बागवानों को मूलभूत सुविधाओं की कमी खल रही है। यहां तक मंडी का मुख्य द्वार भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्मचंद ठाकुर ने सरकार से सड़क को चौड़ा करने की मांग की है। एसोसिएशन का प्रयास रहता है कि बागवानों को असुविधा न हो।
आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य सुरेश कुमार ने बताया कि बिजली कटौती, पेयजल संकट और शौचालय निर्माण की मांग कई बार उठाई गई है। हालांकि, अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
-बागवान राजेश कुमार ने कहा कि मंडी में बेहतर शौचालय और बैठने के स्थानों की कमी है। ग्रामीण संपर्क सड़कों की हालत भी बेहद खराब है। सड़कों की मरम्मत की जाए।
एपीएमसी की ओर से बनाया गया शौचालय भूस्खलन के कारण खतरे वाले क्षेत्र में आने से बंद है। फिलहाल, एक अस्थायी शौचालय जल्द चालू किया जाएगा। स्थायी शौचालय निर्माण का प्रस्ताव तैयार हो रहा है। एस्टीमेट बनाकर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। बागवानों के बैठने के लिए मंडी परिसर में बेंचें भी लगाई जाएंगी।
दीक्षित, सचिव, एपीएमसी कुल्लू
खेगसू सेब मंडी, जहां नहीं बैठने तक की व्यवस्था। संवाद
खेगसू सेब मंडी, जहां नहीं बैठने तक की व्यवस्था। संवाद
खेगसू सेब मंडी, जहां नहीं बैठने तक की व्यवस्था। संवाद
खेगसू सेब मंडी, जहां नहीं बैठने तक की व्यवस्था। संवाद
खेगसू सेब मंडी, जहां नहीं बैठने तक की व्यवस्था। संवाद