लाहौल के त्रिलोकनाथ में ऐतिहासिक पोरी मेले के शुभारंभ पर त्रिलोकीनाथ मंदिर के दर्शन को निकलते त?
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उदयपुर (लाहौल- स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल के उपमंडल उदयपुर के त्रिलोकनाथ में इस बार भी ऐतिहासिक पोरी मेला कोरोना के चलते फीका रहा। औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए त्रिलोकीनाथ मंदिर कमेटी के कारकूनों और पुजारी लामा ने त्रिलोकनाथ मंदिर में पूजा-पाठ किया।
इसके बाद मेला मैदान में धार्मिक रस्में निभाई गईं। शनिवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने पोरी मेला का शुभारंभ किया। वहीं रविवार को त्रिलोकनाथ से चंबा जिला के मणिमहेश की डल झील की ओर श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था रवाना होगा। यह जत्था हर वर्ष त्रिलोकनाथ में मनाए जाने वाले पोरी मेले के समापन पर रवाना होता है।
गौरतलब है कि जत्थे के रवाना होने से पहले गूर खेल से भविष्यवाणी भी करते हैं। उसके उपरांत जत्था करीब चार-पांच दिन की पदयात्रा कर त्रिलोकनाथ से मणिमहेश पहुंचते हैं। महिलाएं भी मनोकामनाओं के लिए पवित्र यात्रा में शामिल होती हैं।
त्रिलोकनाथ मंदिर के पुजारी लामा हिशे ने कहा कि इस बार ऐतिहासिक त्रिलोकनाथ पोरी मेले में कोरोना के चलते महज धार्मिक रस्मों की अदायगी की गई। रविवार सुबह त्रिलोकनाथ से कुगती पास होते हुए श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था मणिमहेश झील की ओर रवाना होगा।
एतिहासिक पोरी मेले का स्थानीय लोगों के साथ आसपास के इलाकों में विशेष इंतजार रहता है। मेले में खेल और सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धाओं के अलावा आवश्यक सामानों का बाजार सजता था। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं।