संवाद न्यूज एजेंसी
जिभी (कुल्लू)। गुच्छी के कारोबार के लिए विख्यात बंजार मेले में पहली बार व्यापारियों को ढूंढने से भी गुच्छी नहीं मिल रही है। इसका असर बंजार मेले पर पड़ा है। इस साल गुच्छी का 80 फीसदी तक कारोबार कम हुआ है।
प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी सूखे के कारण लोगों को पहले की तरह इस बार जंगलों में नहीं मिल पाई है। बंजार क्षेत्र में हर साल मार्च और अप्रैल में लोग बड़े पैमाने पर गुच्छी को जंगल में तलाश करने जाते हैं। इसका असर बंजार मेले में आए गुच्छी के व्यापारियों पर देखने को मिला। इससे क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी पर भी असर पड़ा है। लोग गुच्छी कम मिलने से मेले में सजी दुकानों से खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। गुच्छी व्यापारी बेली राम का कहना है कि वह हर वर्ष आठ से दस क्विंटल गुच्छी खरीदते थे, मगर इस बार वह सिर्फ दो क्विंटल भी नहीं खरीद पाए हैं। इस बार भी बंजार मेले में 9000 रुपये किलो के हिसाब गुच्छी खरीद रहे हैं। व्यापारी गुमत राम का कहना है कि बंजार मेला पहली बार मंदा रहा है, जो लोग दस किलो गुच्छी लेकर आते थे, वह अब किलो व आधा किलो ही लेकर आ रहे हैं। गुच्छी के थोक व्यापारी मोहर सिंह का कहना है उनका लक्ष्य 40 से 50 क्विंटल गुच्छी लेने का रहता है। बंजार मेले में इस वर्ष कारोबार मंदा ही रहा है। गुच्छी के कारोबार का असर बंजार मेले पर भी पड़ा है। राम प्यारी, बिमला देवी, मोहर सिंह तथा निका राम ने कहा कि उन्होंने दो माह तक गुच्छी की तलाश की, लेकिन सूखे से गुच्छी ढूंढने से भी नहीं मिली।