उदयपुर (लाहौल स्पीति)। रोहतांग से सटी लाहौल घाटी के प्रवेशद्वार कोकसर के बाशिंदे दशकों से मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। सर्दियों में कोकसर पंचायत के डिंफुक व कोकसर गांव के लोगों को पांच माह के लिए अपने गांव से पलायन कर दूसरी जगह जाना पड़ता है। इस क्षेत्र के लिए कोई भी सरकार अभी तक आगे नहीं आई है।
सर्दियों के दिनों में कोकसर में दूरसंचार सेवा ठप पड़ जाती है। अगर कोई बीमार पड़ जाए तो अस्पताल को दूर यहां से मरीज 13 किलोमीटर दूर सिस्सू पीएचसी भी नहीं पहुंच पाते, लेकिन दशकों से यहां के लोग कांग्रेस व भाजपा से कोकसर में हैलीपैड बनाने की मांग करते रहे हैं। इस मसले पर यहां के लोगों को महज आश्वासन ही मिले हैं। सरकार की अनदेखी के चलते कोकसर पंचायत के 47 घरों की आबादी को मजबूरन पलायन करना पड़ता है। बर्फबारी के बीच कोकसर के बाशिंदे बिजली, पानी, संचार सेवा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए तरसते हैं। कोकसर के स्थानीय निवासी अमर चंद, प्रेम चंद, फुडगो छेरिंग और डिंफुक के ओमप्रकाश, सुरेंद्र कुमार, चरंजी लाल ने कहा कि अगर सरकार कोकसर पंचायत के लोगों को मूलभूत सुविधा मुहैया करवाती है तो उन्हें पलायन करने की आवश्यकता नहीं होगी। दशकों से प्रदेश की सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। जिसको लेकर स्थानीय जनता में रोष है। पूर्व मंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ राम लाल मार्कंडेय ने कहा कि कोकसर में समस्या है। उन्होंने अपने कार्यकाल में दौरान कोकसर डिस्पेंसरी में डॉक्टर तैनात रखे थे, लेकिन वर्तमान में यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हवाले चल रही है। लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कोकसर के लोगों को पीएचसी की सौगात दी है। हेलीपैड के लिए अभी तक औपचारिकताएं पूरी नहीं है।