ढोल-नगाड़ों की थाप से गूंजी रघुनाथ की नगरी
देवताओं के अस्थायी शिविरों को दिनभर सजाते रहे देवलु
दशहरा के सफल आयोजन के लिए चला बैठकों का दौर
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। 19 से 25 अक्तूबर तक मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव के लिए भगवान रघुनाथ की नगरी ढालपुर तपोवन में तब्दील हो गई है। स्वर्गलोक में बदला ढालपुर का नजारा ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों, करनाल और शहनाई की स्वरलहरियों से गूंज उठा। उत्सव में अपनी भागीदारी के लिए जिला भर से देवी देवताओं का पहुंचना शुरू हो गया है, जो 19 अक्तूबर दोपहर तक जारी रहेगा। वीरवार सुबह से ही देवी देवताओं के देवलु, कारकून और हरियान देवताओं के ठहराव वाली जगहों पर अस्थायी शिविरों को सजाने में लगे रहे।
ढालपुर में आनी-निरमंड, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण और ऊझी घाटी के करीब 150 देवी देवता अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। देवी देवता के दशहरा में पहुंचने पर हर किसी ने अपना शीश देवरथों के आगे झुका कर सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद लिया। देवी-देवताओं के इस विश्व विख्यात महाकुंभ में आए देशभर से आए सैकड़ों कारोबारी भी अपने हाट-बाट को सजाने में व्यस्त रहे। डोम लगाने के साथ-साथ झूला और अन्य कई स्टालों को सजाने का कार्य अब लगभग पूरा हो गया है। उधर, दशहरा उत्सव के सफल आयोजन को लेकर दशहरा उत्सव समिति दिनभर व्यस्त रही और सुबह से शाम तक बैठकों दौर चलता रहा। इस दौरान भगवान रघुनाथ की ऐतिहासिक एवं भव्य रथयात्रा से लेकर मुख्यातिथि के स्वागत, देवी देवताओं के आगमन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू युनूस ने कहा कि दशहरा के लिए देवी देवता ढालपुर पहुंचने शुरू हो गए हैं।