बंजार बस हादसे में झकझोर कर रख दी पूरी घाटी
एक झटके में बुझ गए चार पंचायतों के कई चिराग
नन्हें बच्चों की मौत के बाद वीरान हो गई माता-पिता की जिंदगी
हादसे के तीसरे दिन भी नहीं थमे आंसू, बच्चे मां-बाप तो बड़े नहीं सह पा रहे अपने लाडलों का बिछोड़ा
हरि रामचंद्र चौधरी
सैंज (कुल्लू)। .....आंसू..... आंसू और आंसू। बंजार बस हादसे ने पूरी घाटी को झकझोर कर रख दिया है। न किसी को खाने की सुध है और न सोने की। हर तरफ आंसुओं का सैलाब उमड़ रहा है। एक झटके में ही क्षेत्र की चार पंचायतों के दर्जनों चिराग बुझ गए। हादसे से संभलने को शायद ताउम्र लग जाए। किसी की मां रो रही है तो किसी के पिता। कोई बहन का बिछोड़ा सह नहीं पा रहा है तो कोई भाई का। नन्हें बच्चों के बिना तो कइयों की जिंदगी ही वीरान हो गई है।
कोई देवताओं को कोस रहा है तो कोई व्यवस्था को। घरों में रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। जख्म इतने गहरे हैं कि आसानी से आंसू रुक नहीं रहे हैं। छात्र इंगित नेगी की माता किरन अभी भी कह रही हैं कि बेटा स्कूल से आने वाला है। जवान बेटे की अर्थी देखने के बाद वह होश खो चुकी है। पिता राम लाल की तो जैसे पूरी दुनिया ही उजड़ गई है। घर में बेटे के सामान को देखकर आंसुओं की धाराएं बह रही हैं। उधर, सुमा गांव में पत्रकार मोहन लाल की पत्नी गीता देवी पर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। पति और एक बेटी हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुके हैं। एक बेटी कुल्लू अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है। मोहन लाल के भाई वीर सिंह खुद सदमे में होते हुए भी ढंाढस बंधा रहा है। छुनार गांव में पति विष्णु की मौत से पत्नी विद्या देवी सुध-बुध खो चुकी है। झमाच गांव में पत्नी दुर्गा देवी की याद में करतार सिंह की आंखें पथरा गई हैं। टील गांव की दो बेटियां कॉलेज गई , लेकिन लौटकर नहीं आई। कुसम लता के पिता गुरदयाल और धनेश्वरी के पिता खेम देव को अपनी लाड़ली बेटियों ने अंदर से तोड़ कर रख दिया है। पूरे गांव में अभी भी मातम सा माहौल है। पूरी बंजार घाटी के कई गांव में एक सा माहौल है। लोग समझ नहीं पा रहे है कि अपनों के बिछड़ने का गम कैसे भुलाया जाए। हालांकि घरों में दूर-दूर से रिश्तेदारों के साथ गांव के लोग सांत्वना देने के लिए पहुंचे रहे हैं।