अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू में पड़ रही कड़ाके की ठंड से लोग परेशान हैं। शीत लहर के साथ जहां कुल्लू जिले के बाजारों में सुबह-शाम सन्नाटा पसरने लगा है, वहीं सैकड़ों पेयजल स्कीमें जाम हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहराने लगा है। बताया जा रहा है कि कई साल के बाद कुल्लू में इतनी अधिक ठंड पड़ रही है।
ठंड से जिले में बागवानी कार्य भी प्रभावित होने लगे हैं। तापमान के शून्य से नीचे लुढ़कने से पानी के मुख्य स्रोत जाम होने लगे हैं। कई जगहों पर पानी की सप्लाई पाइप में ही जाम होने लगी है। इससे ग्रामीणों को पानी की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ पर्यटन नगरी मनाली व अन्य बाजारों में ठंड से रौनक गायब होने लगी है। सुबह-शाम के समय लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं। जिला के बाजार सुबह आठ बजे के बजाय दस बजे केे आसपास खुल रहे हैं। यही हाल शाम के वक्त भी देखने को मिल रहा है। शाम को अधिकतर दुकानें सात बजे से पहले ही बंद होने लगी है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड से पानी की स्कीमों के साथ नदी-नालों का पानी भी ठोस परत की भांति जमने लगा है। जलोड़ी दर्रा के साथ जिला के कई मार्ग ऐसे हैं, जो नदी-नालों से होकर गुजरते हैं। लेकिन पानी जमने से इन जगहों पर हादसे का खतरा बन गया है। उधर, आईपीएच कुल्लू के अधिशासी अभियंता कुल्लू केआर कुल्लवी ने कहा कि फिलहाल स्थिति सामान्य है। मनाली, नग्गर क्षेत्रों में इस तरह की समस्या आ रही है। ग्रामीण तेज राम, निका राम, संगत राम, राजेश, हंस राज, बालक, गुमत राम, आलम चंद, मोहर सिंह, प्रेम सिहं, निरत सिंह, संजय कुमार, हेत राम, जयकिशन तथा बीर सिंह ने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों से जोड़ी गई स्कीमें सुबह-शाम प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि ठंड से बागवानी कामकाज भी समय पर नहीं हो रहा है। इन दिनों सेब के बगीचों में तौलिए बनाने के साथ प्रूनिंग व खाद डालने का काम चल रहा है।
इन क्षेत्रों में ठंड का अधिक असर
ठंड से जाम हो रही योजनाओं का सबसे अधिक असर जिला कुल्लू के नग्गर, खराहल, बंजार, मणिकर्ण, बठाहड़, तीन कोठी के अलावा बाह्य सराज में पड़ रहा है। इन इलाकों में सुबह व शाम के समय अधिक समस्या झेलनी पड़ रही है।
30 फीसदी स्कीमें होने लगी जाम
जिला कुल्लू में आईपीएच महकमे की करीब 550 पेयजल स्कीमें संचालित हैं। इनमें से 30 फीसदी तक स्कीमें कड़ाके की ठंड में जाम होने लगी हैं। सबसे अधिक योजनाएं ऊझी घाटी, बंजार तथा बाह्य सराज में प्रभावित होने लगी हैं।