अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। बर्फ के बीच लोग पीने के पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में प्रचंड ठंड के कारण पानी के पाइप और जल स्रोत जम गए हैं। इससे लाहौल घाटी के कई इलाकों में पेयजल किल्लत पैदा हो गई है। चंद्रभागा नदी के वाम तट पर बसे दर्जनों गांवों में पेयजल समस्या से लोग जूझ रहे।
लोगों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोकर अपनी और पालतू मवेशियों की प्यास बुझानी पड़ रही है। घाटी के 100 घरों वाले सबसे बडे़ गांव गौशाल में पानी के पाइप जम जाने से सभी नल सूखे पड़ गए हैं। ग्रामीणों को करीब दो किमी दूर कारगा से वाहनों से पानी ढोना पड़ रहा है। जिन लोगों के पास वाहन उपलब्ध नहीं है, वे मजबूरन चंद्रभागा नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में सदियों से बहने वाला रूपीरानी का ऐतिहासिक जल स्रोत भी जम गया है। गांव के उप प्रधान अजीत सिंह ने कहा कि बर्फबारी से पहले ही आईपीएच महकमे को संभावित जल संकट से आगाह कर दिया गया था। लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन आज पूरा गांव पानी की बूंद-बूंद को तरस गया है। गांव में करीब पांच सार्वजनिक नल हैं। फिलहाल सभी नल सूख गए हैं। दिनेश, राकेश, रमेश, अमर, कुलजीत, रोहित ने कहा कि विभाग ने कई पेयजल स्कीमों के पाइप भूमिगत न होकर जमीन के ऊपर से बिछाए हैं। ऐसे में पाइप जम रहे हैं। उधर, चंद्रभागा नदी के वामतट पर बसे गांव लिंगर, रापे, राशिल, जोबरंग, जसरथ, नालडा, किशोरी, शकौली, सलपट, सलग्रां समेत दर्जनों गांव में पेयजल संकट पैदा हो गया है।
घाटी में इन दिनों तापमान शून्य से करीब 16 डिग्री नीचे चला गया है। प्रचंड ठंड के कारण पेयजल स्रोत और पाइप जम रहे हैं। इससे पानी की समस्या उत्पन हुई है। विभाग स्थानीय लोगों की मदद से समस्या को दूर करने का प्रयास कर रहा है।
-एचएस भारद्वाज, अधिशाषी अभियंता, आईपीएच विभाग