पालमपुर (कांगड़ा)। कुछ वर्षों से किसानों के खेतों से लुप्त हो रही राइसबीन (मोंठ की दाल) की खेती अब खेतों में फिर से लहराना शुरू होगी। मोंठ खनिज पदार्थ, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर है, जो व्यक्ति के शरीर के लिए अति लाभदायक है। साथ ही मोंठ अब आने वाले दिनों में मास (माह) और मूंग की दाल को भी खराब होने से बचाएगा। किसानों के खेतों से लुप्त हो रहे मोंठ पर कृषि विवि के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजन कटोच ने 17 साल का एक लंबा शोध किया है। उन्होंने शोध में मोंठ में पाए जाने वाले सभी गुणों की पहचान की है।
इस पर उन्होंने एक किताब राइस बीन एक्स प्लॉइटिंग द न्यूट्रीशनल पोटेंशियल ऑफ एन अंडर यूटिलाइज्ड लेग्यूम लिखी है। पिछले कुछ सालों से मोंठ के प्रति लोगों की रुचि करीब खत्म हो गई थी, इसका कारण लोगों को इसमें पाए जाने वाले खनिजों का पता नहीं था। लिहाजा, लोगों का मोंठ की दाल के प्रति रुझान खत्म हो रहा था, लेकिन अब इस पर किए गए शोध से आने वाले समय में किसान मोंठ का उत्पादन कर सकते हैं।
शोध में इस बात का पता लगाया गया है कि प्रोटीन, खनिज पदार्थ और प्रोटीन से लवरेज मोंठ की दाल खराब नहीं होती है। इसमें जो जीन पाया गया है, उसमें कीड़ी नहीं लगती है, जबकि मास और मूंग की दाल ज्यादा दिनों के बाद खराब हो जाती है, लेकिन अब बड़ी बात यह है कि मोंठ में जाने वाले जीन को मास और मूंग में तबदील किया जा सकता है। इससे इन दालों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और ये दालें खराब नहीं होंगी। कृषि विवि में भारत सरकार की ओर से आने वाली अनुसंधान योजनाओं के माध्यम से किए गए डॉ. राजन के शोध पर लिखी किताब राइसबीन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने भी मान्यता दी है। लिहाजा, डॉ. राजन कटोच की यह पुस्तक आने वाले दिनों में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए काफी लाभदायक होगी। जो वैश्विक खाद्य और सुरक्षा पोषण में काफी सहायक सिद्ध होगी। कृषि विवि के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजन कटोच की लिखी पुस्तक राइसबीन एक्सप्लॉइटिंग द न्यूट्रीशनल पोटेंशियल ऑफ एन अंडर यूटिलाइज्ड लेग्यूम का विमोचन कृषि विवि में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और विस अध्यक्ष विपिन सिंह परमार की मौजदूगी में किया।