धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की सरकारी प्रयोगशाला में करीब एक माह से थायराइड की जांच बंद है। लैब में आवश्यक केमिकल उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं और थायराइड मरीजों पर पड़ रहा है।
अस्पताल में रोज बड़ी संख्या में मरीज थायराइड जांच के लिए पहुंचते हैं लेकिन सरकारी लैब से उन्हें यह कहकर लौटाया जा रहा है कि फिलहाल जांच संभव नहीं है। डॉक्टर जांच की सलाह दे रहे हैं जबकि मरीजों को अस्पताल परिसर स्थित क्रस्ना लैब भेजा जा रहा है। वहां लंबी कतारों के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
स्थिति यह है कि सरकारी लैब में करीब एक साल से सीबीसी जांच भी नहीं हो रही है। इसके लिए भी गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को क्रस्ना लैब जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था में थायराइड की नियमित जांच जरूरी होती है। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने से मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। थायराइड मरीजों के लिए भी समय-समय पर जांच जरूरी है ताकि दवा की सही मात्रा तय की जा सके। मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से सरकारी लैब में जल्द केमिकल उपलब्ध करवाकर जांच सुविधा बहाल करने की मांग की है।
सरकारी लैब में थायराइड मशीन के लिए कैमिकल के ऑर्डर के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल की लैब में ही थायराइड का टेस्ट हो सकेगा। फिलहाल मरीज क्रस्ना लैब में टेस्ट करवा सकते हैं। -डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला