पालमपुर (कांगड़ा)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार ने कहा कि देवभूमि हिमाचल में बढ़ते नशे के कारोबार और चिट्ठे के प्रकोप को रोकने में शासन और प्रशासन पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। युवा पीढ़ी भी संस्कार विहीन हो गई है। शांता कुमार ने कानून-व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की सख्त जरूरत पर बल दिया है।
शांता कुमार ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि नशे के काले धंधे में खाकी भी दागदार हो रही है। चार पुलिस कर्मियों का इस अपराध में संलिप्त पाया जाना और उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाना विभाग की साख पर गहरा धब्बा है। पिछले तीन वर्षों में नशे की ओवरडोज से हुई 66 मौतों के आंकड़े को उन्होंने डरावना बताते हुए इसे नई पीढ़ी की बर्बादी का संकेत करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी संस्कार विहीन हो गई है। आज हर बच्चे के हाथ में मोबाइल है, जिसके कारण संवाद खत्म हो रहा है। कोई भी बच्चा अपने माता-पिता या दादा-दादी के पास बैठकर कुछ सीखने को तैयार नहीं है। परिवार और समाज से मिलने वाले संस्कारों की कमी के कारण ही अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। शांता कुमार ने कहा कि स्कूलों में योग और नैतिक शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए।