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समय पर सरकारी खरीद न होने पर निजी ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले

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रे (कांगड़ा)। जिला भर में 15 अप्रैल से सरकारी अनाज मंडियों में गेहूं खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन रियाली अनाज मंडी अभी भी सफेद हाथी साबित हो रही है। उपमंडल फतेहपुर के सीमांत क्षेत्र की अनाज मंडी रियाली में समय पर सरकारी खरीद न होने पर किसानों में विभाग और प्रदेश सरकार के प्रति भारी रोष है। अन्य जगहों पर सरकार के निर्धारित समय पर खरीद हो रही है, तो रियाली अनाज मंडी में आखिर क्यों नहीं हो रही।
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सूत्रों की मानें तो हिमाचल का कंडी क्षेत्र पंजाब की सीमा के साथ बिल्कुल सटा हुआ है। बहुत से व्यापारी लोग अपनी एनसी गाड़िया लेकर हिमाचल में घुस जाते हैं और कुछ किसान उनको ही अपनी फसल दे देते हैं। गेहूं का वजन करते समय ये हिमाचल की भोली भाली जनता को ठगी का शिकार बना लेते हैं। हिमाचल से गेहूं को खरीद कर पंजाब में अधिक दामों में बेच कर खूब चांदी लूट रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र के ग्रामीण राज भगवान, सरूप, राकेश, संजय कुमार, पवन, तरलोक, सुरेंद्र, राजेश आदि ने प्रशासन से मांग की है कि बाहरी व्यापारी इन क्षेत्रों में न आएं।
-किसान राजेश कुमार का कहना है कि सरकार ने रियाली में मंडी खोल कर अच्छा कार्य किया है, लेकिन समय पर सरकारी खरीद न होने पर सरकार ने निजी ठेकेदारों की बल्ले बल्ले करवा दी है। इसका खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा।
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-किसान प्रताप सिंह का कहना है कि रियाली अनाज मंडी में पक्का रैंप भी नहीं है। कच्चे रैंप पर ट्रैक्टर की ट्राली चढ़ाना असुरक्षित है। यहां पक्का रैंप होना अनिवार्य है, ताकि ट्रैक्टर की ट्राली से गेहूं सुरक्षित स्थान पर पहुंचाई जा सके।
-अजय कुमार कहना है कि जो टोकन किसानों को दिया गया है, उसी डेट को किसानों की गेहूं खरीदी जाए। अगर उस डेट पर गेहूं न लेकर किसानों को लटकाया जाता है, तो इस बद इंतजामी को लेकर सरकार के खिलाफ मौके पर ही धरना-प्रदर्शन करेंगे।
-किसान बलवीर सिंह का कहना है कि मंडी में गेहूं का अपना नंबर लगवाने के लिए अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में कई बार वहां फिर रहे बेसहारा पशु तंग करते हैं।
प्रदेश सरकार ने टेंडर और निर्माण कार्य में की देरी: भवानी
भवानी सिंह पठानिया विधायक फतेहपुर का कहना है कि प्रदेश सरकार ने खरीद केंद्र के टेंडर और निर्माण कार्य दोनों ही देरी से की है। इससे दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों की गेहूं भरने के लिए 12 घंटे की बजाय 24 घंटे का समय निर्धारित कर देना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
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