नूरपुर (कांगड़ा)। गर्मियों में फायर सीजन के दौरान जंगलों को आग की घटनाओं से बचाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। पंजाब राज्य की सीमा से सटे वन मंडल नूरपुर के तहत नूरपुर, जवाली, इंदौरा और फतेहपुर राजस्व उपमंडलों की बहुमूल्य वन संपदा को आग से बचाने के लिए विभाग ने कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत वन मंडल नूरपुर में एक कंट्रोल रूम बनाया है। इसमें एसीएफ नूरपुर को नोडल अधिकारी बनाया है। साथ ही फील्ड स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और 82 बीटों में फायर वाचर तैनात किए जा रहे हैं।
वन विभाग हर साल पहली अप्रैल से 15 जून तक फायर सीजन मानकर वनों को आग से बचाने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार करता है। डीएफओ नूरपुर अमित शर्मा ने बताया कि इस फायर सीजन में विभाग ने नूरपुर वन मंडल के तहत पड़ने वाली पांच वन परिक्षेत्रों (फोरेस्ट रेंज) नूरपुर, कोटला, जवाली, इंदौरा और रे के जंगलों में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। नूरपुर वन मंडल के अंतर्गत लगभग 53 हजार हेक्टेयर वन भूमि आती है। इसमें लगभग 48 वन बीट आग की दृष्टि से संवेदनशील हैं, जिसमें 15 वन बीट आग की दृष्टि से संवेदनशील और 34 वन बीटें अति संवेदनशील हैं, जिनके बचाव के लिए विभाग सतर्क है।
आग से बचाने के लिए करीब 29 हजार हेक्टेयर फायर लाइन की मरम्मत की है, ताकि गर्मियों में आग की घटनाएं न हों और अगर कहीं आग की घटना घट जाए तो आग आगे न फैले। वन मंडल नूरपुर में वनों को आग से बचाने के लिए विभाग ने तैयारियां कर ली हैं। उन्होंने क्षेत्र की जनता से वनों को आग से बचाने के लिए सहयोग की अपील की है।