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स्कूल खोलने के पक्ष में अभिभावक और अध्यापक

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जसूर (कांगड़ा)। 31 जनवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में स्कूलों को खोलने के लिए सरकार नई अधिसूचना जारी करेगी। जसूर क्षेत्र के निजी स्कूलों और उनमें पढ़ रहे बच्चों के अधिकांश अभिभावक और अध्यापक स्कूल खोलने के पक्ष में हैं और सभी चाहते हैं कि वार्षिक परीक्षा से पहले सभी बच्चों को कम से कम एक महीना तो स्कूल आकर पढ़ने दो।
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अभिभावक अजय ठाकुर ने कहा कि बच्चे पूरा-पूरा दिन ऑनलाइन कक्षाओं के चक्कर में फोन के साथ लगे रहते हैं और पूरा-पूरा दिन घर से बाहर नहीं निकलते हैं। बच्चों का मन पढ़ाई से हट रहा है और उनकी आंखों में दिक्कत आना शुरू हो गई है।
अभिभावक सुनीता देवी ने बताया कि घर में रहकर बच्चे चिड़चिडे़ से हो गए हैं। वे सही तरीके से न पढ़ रहे हैं न ही उन्हें फोन पर पढ़ना आता है। न ही वे अच्छे ढंग से सीख पा रहे हैं। सरकार जल्द से जल्द नर्सरी से दसवीं तक के स्कूल खोलने के लिए आदेश जारी करे, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य सुधर सके।
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अध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि ऑनलाइन कक्षा मात्र बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का एक तरीका है। परंतु सही शिक्षा और पढ़ाई बच्चा सिर्फ और सिर्फ स्कूल में ही आकर सीख सकता है। सरकार से निवेदन है कि सरकार 31 जनवरी को होने वाली मीटिंग में नर्सरी से 12वीं तक के सारे स्कूल सभी बच्चों के लिए खोल दे।
निजी स्कूल के अध्यापक निर्मल ठाकुर का कहना है कि बच्चों को बार -बार फोन पर अपना चेहरा दिखाने के लिए बोलने के बावजूद और अपनी कॉपी या होमवर्क के बारे में बोलने पर भी बच्चे अपने आप को फोन खराबी का या नेटवर्क का बहाना बनाकर छुपा लेते हैं। सभी बच्चे मोबाइल गेम या फिर चैटिंग में व्यस्त होते हैं। नतीजा यह निकल कर सामने आ रहा है कि सभी बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक रूप से भी पिछड़ चुके हैं।
कांगड़ा निजी स्कूल संगठन के उपाध्यक्ष सुशवीन पठानिया ने बताया कि दो महीने पहले जब नर्सरी से लेकर दसवीं तक के सभी स्कूलों को खोला गया था तो स्कूल में सभी बच्चों को 100 प्रतिशत संख्या से अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल में भेजा था।
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