धर्मशाला। कांगड़ा जिले में अब तक केवल 53 फीसदी किसानों ने कृषि भूमि का रिकॉर्ड एग्रीस्टैक पोर्टल पर डिजिटल करवाया है। कृषि विभाग ने जिले में कुल 2.32 लाख किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। रबी सीजन को देखते हुए विभाग ने शेष किसानों से तुरंत यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।
इस व्यवस्था के तहत पंजीकृत किसानों की एक डिजिटल किसान आईडी बनाई जाएगी। पोर्टल पर दर्ज कृषि भूमि और खसरा-खतौनी के आधार पर ही भविष्य में खाद की उपलब्धता और उर्वरक का कोटा तय होगा। पंजीकरण न करवाने वाले किसानों को आगामी दिनों में खाद मिलने में कठिनाई हो सकती है।
किसान नजदीकी लोक मित्र केंद्र में जाकर यह रिकॉर्ड डिजिटल करवा सकते हैं। विभाग के अनुसार यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है। इसके लिए किसानों को आधार कार्ड, लिंक मोबाइल नंबर और जमीन की पर्ची साथ लानी होगी।
कृषि उपनिदेशक डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना है। इससे किसानों को उनकी वास्तविक भूमि के अनुपात में ही खाद मिलेगी और अनियमित वितरण पर रोक लगेगी।
डिजिटलीकरण के फायदे
एग्रीस्टैक पोर्टल पर भूमि का विवरण दर्ज होने से किसानों को एक स्थायी डिजिटल पहचान मिलेगी। इससे सरकारी योजनाओं और अनुदान का सीधा लाभ उठाने में मदद मिलेगी। जमीन के रिकॉर्ड का ऑनलाइन सत्यापन होने से पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध होगा और भविष्य की सभी कृषि सेवाओं की राह आसान होगी।