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शिमला-मटौर एनएच को लेकर नोटिस मिलना शुरू

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कांगड़ा। राजस्व विभाग की ओर से मटौर-शिमला नेशनल हाईवे की जद में आई जमीन के मुआवजे को लेकर नोटिस भेजे जा रहे हैं। लोगों को मुआवजा जल्द से जल्द मिले, इसके लिए प्रशासन ने लोगों को संबंधित पटवारखानों में दस्तावेज जमा करवाने का आग्रह किया है।
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कांगड़ा के एसडीएम अभिषेक वर्मा ने बताया कि मटौर-शिमला नेशनल हाईवे के अंतर्गत जिन लोगों की भी जमीन की 3डी नोटिफिकेशन मार्च 2019 और फरवरी 2021 को हो चुकी है, उन सभी लोगों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बहुत से लोगों को नोटिस दिए भी जा चुके हैं। जिन लोगों को भी यह नोटिस मिल रहे हैं, वे बिना देरी किए अपने नजदीकी पटवारखाने में नोटिस लेकर जाएं। नोटिस में उनसे जो भी दस्तावेज मांगे गए हैं, उन्हें पटवारखानों में जमा करवा दें, ताकि लोगों को जमीन का मुआवजा जल्द दिया जा सके। नोटिस के बाद प्रारंभिक कार्रवाई के बाद लोगों को जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है। जमीन के मुआवजे के अतिरिक्त स्ट्रक्चर और पेड़ों आदि का भी विभाग की ओर से इवैल्यूएशन किया जाएगा।
4 माह पहले अवार्ड मुआवजा राशि नहीं मिली
जसूर (कांगड़ा)। फोरलेन परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण पर चार माह पहले अवार्ड लेटर जारी होने के बावजूद सभी प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। मानवाधिकार लोकल बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने आरोप लगाया कि इतना अरसा बीत जाने के बाद सिर्फ कुछ राजस्व मुहालों में कुछ लोगों को ही मुआवजा मिल पाया है। अधिकांश प्रभावित लोग अभी तक मुआवजे की राशि का इंतजार ही कर रहे हैं। राजेश पठानिया के अनुसार इस पूरी परियोजना को शुरू से ही अव्यवस्थित ढंग से चलाया गया है। इसका खामियाजा फोरलेन प्रभावितों को उठाना पड़ रहा है। 4 साल की अवधि में मात्र कुछ किलोमीटर लंबी सड़क की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पा रही है। दुख इस बात का भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में भी त्रुटियां हैं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण एक ही मुहाल की जमीन के दो अलग-अलग रेटों पर आधारित मुआवजे का देना है। कंडवाल में एक ही जमीन के दो चरणों में दिए गए मुआवजे में पहले दस हजार प्रति मरला और दूसरे चरण में एक लाख प्रति मरला दी गई। इसके चलते प्रथम चरण में दिए गए मुआवजे में लोगों से प्रशासन की ओर से छल किया गया है। इस प्रक्रिया से प्रशासन द्वारा जमीन की वास्तविक कीमत को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है है।
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तकनीकी कारणों से रोका मुआवजा
कुछ दिन पहले ही यह पदभार संभाला है। इस पूरे मामले को देखा जाएगा तथा प्रयास होगा कि प्रभावित लोगों को जल्द मुआवजा मिल सके। विशेषकर उन लोगों की जमीन का मुआवजा रोका गया है, जहां कुछ तकनीकी कारण है।
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अनिल भारद्वाज, एसडीएम कम भू-मुआवजा अधिकारी, नूरपुर
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