धर्मशाला। प्रदेश सरकार की ओर से जारी एंट्री पास और नाइट कर्फ्यू के निर्देंशों ने जिले में पर्यटन कारोबार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। पर्यटन नगरी धर्मशाला और मैक्लोडगंज में पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह से खत्म हो गई है।
इससे होटल कारोबार पर एक बार फिर आर्थिक संकट मंडराने लगा है। साथ ही कारोबारियों को लोन, टैक्स, बिजली-पानी के बिल आदि का डर सताने लगा है। कोरोना के डर और सरकार के निर्देशों के बाद होटल और रेस्तरां पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं। पर्यटक न आने के कारण दो-तीन दिन के बाद जिले में सभी होटलों और रेस्तरां में ताले लग जाएंगे।
वहीं बढ़ते कोरोना संक्रमण ने लगातार दूसरे साल सबसे बड़े पर्यटन कारोबार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इस कारण पर्यटन कारोबार को करोड़ों रुपयों का नुकसान झेलना पड़ा है। वहीं, होटलों में रहने के लिए हुई एडवांस बुकिंग भी रद्द कर दी गईं है। जानकारी के अनुसार मई के महीने में पर्यटकों ने करीब 30 प्रतिशत बुकिंग करवाई थी, मगर बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण पूरी बुकिंग रद्द कर दी गई हैं। जानकारी के अनुसार जिला कांगड़ा में एक हजार के करीब होटल और 200 से अधिक रेस्तरां हैं, जो इस समय पूरी तरह से प्रभावित हैं। होटल कारोबारियों का कहना है कि वे सरकार के आदेशों का स्वागत करते हैं, पर सरकार को भी चाहिए की वे पर्यटन से जुड़े कारोबारियों का भी ख्याल रखे। आर्थिक मंदी का सामना कर रहे पर्यटन कारोबारियों को सरकार की ओर से मदद प्रदान की जाए और कोरोना काल तक बिजली-पानी, टैक्स आदि को माफ किया जाए।
मई में 50 और जून में 100 प्रतिशत रहती थी ऑक्यूपेंसी
जानकारी के अनुसार गर्मियों के दिनों में पर्यटन नगरी बाहरी राज्यों के पर्यटकों से भरी रहती थी। वहीं मई के महीने में 50 प्रतिशत से अधिक और जून माह में 100 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी रहती थी। मगर कोरोना के कारण पिछले दो सीजन महामारी की भेंट चढ़ गए हैं।
बिजली और अन्य टैक्स माफ करे सरकार: बांबा
कोरोना काल में होटलों में इस समय शून्य ऑक्यूपेंसी के साथ होटल चल रहे हैं। इस समय सरकार को चाहिए कि सबसे बड़े पर्यटन कारोबार को डूबने से बचाया जा सके। सरकार को इस समय सभी होटल, रेस्तरां और होम स्टे के बिजली-पानी, टैक्स आदि को माफ कर थोड़ी राहत पहुंचाई जा सके।
- अश्विनी बांबा, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन धर्मशाला