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चनौर में बन रहा औद्योगिक क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से साबित होगा मील का पत्थर

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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। उपमंडल देहरा और जसवां-परागपुर विस क्षेत्र की सीमा के साथ लगते क्षेत्र चनौर में नया औद्योगिक क्षेत्र बनने जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र चनौर भविष्य में रोजगार की दृष्टि से मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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इस समय देहरा, जसवां परागपुर, नादौन, ज्वालामुखी और फतेहपुर आदि विस क्षेत्रों के लोगों के लिए संसारपुर टैरेस और गगरेट ही एकमात्र नजदीकी औद्योगिक क्षेत्र है, जहां पर बड़े उद्योग स्थापित हैं और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला हुआ है। लेकिन अब चनौर में नया औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाने से लोगों को घर द्वार रोजगार सुनिश्चित होगा। साथ ही स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार के लिए बद्दी, नालागढ़ और लुधियाना आदि शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। जसवां परागपुर के विधायक बिक्रम ठाकुर के प्रदेश सरकार में उद्योग मंत्री बनते ही चनौर में नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जाने के एलान हुआ था।
चिह्नित भूमि को विकसित करने का कार्य जोरों पर
उद्योग विभाग की ओर से चनौर पंचायत में चिह्नित भूमि को विकसित करने का कार्य जोरों से चला हुआ है। यहां पर उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए करीब 500 कनाल भूमि चिह्नित कर ली गई है। उद्योग विभाग ने चनौर पंचायत में चिह्नित भूमि को दो हिस्सों में बांटा है। पहला हिस्सा चनौर खड्ड पर बने पुल के ऊपर और दूसरा हिस्सा पुल के नीचे का है। इन दोनों क्षेत्रों को फेज वन और टू में बांटा गया है। उद्योग विभाग सबसे पहले पुल के नीचे करीब 11 हेक्टेयर चिह्नित भूमि को विकसित करने में लगा हुआ है। ऊपरी हिस्से को बाद में विकसित किया जाएगा।
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खड्ड को चैनलाइज करने का कार्य पूरा
नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिह्नित भूमि चनौर खड्ड के किनारे पर स्थित है। बरसात के समय खड्ड काफी उफान पर होती है। इसलिए उद्योगों को सुरक्षित करने के लिए के लिए चनौर खड्ड में चैनलाइजेशन का कार्य करीब पूरा हो चुका है। खड्ड के चैनलाइजेशन के बाद अब यहां बाढ़ आने की संभावना न के बराबर होगी। साथ ही औद्योगिक प्लाटों तक पहुंचने के लिए संपर्क सड़क को पक्का किया जा चुका है। क्षेत्र विकसित होते ही उद्योगपतियों को यहां प्लॉट आसानी से मिल सकेंगे।
शुरुआती चरण में ही होगा करोड़ों का निवेश
उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नए औद्योगिक क्षेत्र चनौर में पहला बांस आधारित उद्योग लगेगा। इसके लिए 250 करोड़ रुपये का एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है। बांस का प्रयोग छातों के हैंडल, चलने की छड़ियां, विभिन्न उपकरणों के हैंडल, टेंट के खंभे, रस्सियां, सीढ़ियां, टोकरियां, चटाई, खिलौने, हाथ के पंखे और विभिन्न घरेलू और कृषि उपकरण बनाने में भी किया जाता है। इसी तरह दो उद्योग मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट आधारित स्थापित किए जाएंगे। जो करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित होंगे। माना जा रहा है कि साल के अंत तक करीब एक दर्जन उद्योग लग जाएंगे। जिनसे सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल सकेगा।
जयराम सरकार ने वर्ष 2018 में जारी की थी अधिसूचना
जिला कांगड़ा के उपमंडल देहरा की चनौर पंचायत में जयराम सरकार का पहला औद्योगिक क्षेत्र बनाने की अधिसूचना जारी हुई थी। अधिसूचना जारी होने के बाद ही चिन्हित भूमि को विकसित करने का कार्य जोरों से चल रहा है। जानकारी के अनुसार उद्योगों के आधारभूत सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य में करीब 38 औद्योगिक बस्तियों और 15 औद्योगिक एस्टेट्स की स्थापना की गई है। इस समय प्रदेश में 42 हजार छोटे-बड़े उद्योग हैं।
कोट
-जसवां-परागपुर विस क्षेत्र की सीमा के साथ लगते क्षेत्र चनौर में नया औद्योगिक क्षेत्र बनने जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र चनौर भविष्य में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। जो बड़े इन्वेस्टर हैं, वे प्रदेश में आएं और उद्योग धंधे स्थापित करें। इसके लिए उनका प्रयास लगातार जारी है। इतना ही नहीं प्रदेश में औद्योगिक घरानों के लिए प्रदेश सरकार कई सुविधाएं और रियायतें भी दे रही है। उद्योग स्थापित होने से प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश के उद्योगों में करीब 80 फीसदी प्रदेश के युवा कार्य कर रहे हैं और आगे भी जो कंपनियां आएगी उनमें भी प्रदेश के युवाओं को रोजगार का मौका मिलेगा। - बिक्रम ठाकुर, उद्योग मंत्री
-चनौर पंचायत में औद्योगिक क्षेत्र को प्रदेश सरकार विकसित कर रही है। इससे स्थानीय युवाओं और लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और उन्हें रोजगार मिलेगा। उम्मीद है कि शीघ्र ही यहां पर उद्योग लगना शुरू हो जाएंगे। - संजीव कुमार चौधरी, चनौर पंचायत प्रधान
- बड़े-बड़े उद्योग लगने चाहिए, ताकि बीटेक, एमबीए सहित इंजीनियरिंग कोर्स करने वाले छात्रों को घर के निकट ही रोजगार मिल सके। क्योंकि दूसरी जगह नौकरी वाले युवाओं के वेतन का अधिकतर हिस्सा किराया आदि में ही खर्च हो जाता है। - रिजुअल राणा, छात्र
-चनौर में उद्योग स्थापित होने से सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को मिलेगा। अधिकतर महिलाएं दूसरे शहरों में रोजगार के लिए नहीं जाती हैं। चनौर में उद्योग लगने से स्थानीय महिलाओं को घर के निकट ही रोजगार मिल सकेगा और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आर्थिक दृष्टि से मजबूत होंगी। - पूनम धीमान, घियोरी पंचायत प्रधान
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