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29 जुलाई को ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए थे मेजर सुधीर वालिया

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हीद मेजर सुधीर वालिया की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने के बाद सहपाठी - फोटो : Kangra
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पालमपुर (कांगड़ा)। ऑपरेशन रक्षक में अपनी जान गंवाने वाले मेजर सुधीर वालिया का रविवार को पालमपुर में शहीदी दिवस मनाया गया। इस दौरान सेना और प्रशासन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रशासन की ओर से एसडीएम अमित गुलेरिया और सेना की ओर से लेफ्टिनेंट शिशिर पांडे ने फूलमालाएं अर्पित की।
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वहीं, परिजनों और सहपाठियों ने भी उनकी प्रतिमा पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। परिजनों से बहन आशा वालिया, बहनोई प्रवीण आहलूवालिया, भाभी सिमरन वालिया, रिसिका, करणवीर, जैस्मीन, अरमान और नंदिनी मौजूद रहे। कारगिल युद्ध में 25 जुलाई को जुलू टॉप फतह करने वाले मेजर सुधीर वालिया 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाने के बाद 29 जुलाई, 1999 को शहीद हो गए थे। कारगिल युद्ध के बाद सेना को एक बड़ी जानकारी मिली थी कि कुपवाड़ा के अफरुदा के जंगलों में आतंकवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। लिहाजा, मेजर सुधीर वालिया ने आतंकवादियों का सफाया करने के लिए सेना की टुकड़ी का नेतृत्व अपने हाथों में लिया था, लेकिन आतंकवादियों से आमने-सामने हुई लड़ाई के बीच मेजर सुधीर वालिया शहीद हो गए थे। शहीद होने से पहले उन्होंने 20 में से 9 उग्रवादियों को मार गिराया था। इस बीच में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गंभीर रूप से होने के बावजूद अपनी टुकड़ी को उग्रवादियों को मार गिराने का आदेश देते रहे। उग्रवादियों को मार गिराने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वे अस्पताल पहुंचने से पहले ही शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें उनकी बहादुरी पर अशोक चक्र से नवाजा गया। शहीद मेजर सुधीर वालिया को इससे पहले भी दो बार सेना मेडल से नवाजा गया था।
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