रक्कड़ (कांगड़ा)। कर्म करते रहना सुखी जीवन की पहली सीढ़ी है। मोह के त्याग से अंतकरण की शुद्धि होती है। परमात्मा से हमारा नित्य एवं सनातन संबंध है। यह प्रवचन श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के चौथे दिन अतुल कृष्ण महाराज ने नाग मंदिर रक्कड़ में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि माने हुए संबंध एक दिन टूट जाएंगे पर प्रभु से हमारे संबंध सदैव एवं अटूट रहेंगे। अपने को कभी अकेला नहीं अनुभव करना चाहिए। याद रखें, ईश्वर सदैव आपके साथ है। दूसरे देवताओं की भक्ति कठिन है, जबकि भगवान शिव अपने ऊपर मात्र जल चढ़ा देने से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
ईश्वर में तन्मय मन जन्म-जन्मांतर के वासनामय बीजों को भस्म कर डालता है। हमारा अस्तित्व परमात्मा से भिन्न नहीं है। मंगलवार को कथा में भगवान कार्तिकेय का प्राकट्य, श्रीगणेश भगवान की लीला एवं तारकासुर के वध का प्रसंग लोगों ने अत्यंत तन्मयता से सुना।