धर्मशाला। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल की सीधी मार अब स्टेशनरी कारोबार पर पड़ने लगी है। ईंधन महंगा होने से ढुलाई खर्च बढ़ गया है, वहीं प्लास्टिक और रसायन जैसे पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की लागत बढ़ने से पेन-पेंसिल और अन्य उत्पादों के थोक दाम चढ़ गए हैं।
खरीद लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण खुदरा दुकानदार सामान पुरानी कीमतों पर ही बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनके मुनाफे में करीब ढाई फीसदी की गिरावट आई है। स्टेशनरी कारोबारी विशाल, सुरेश, रेखा और अनुज के मुताबिक कंपनियों ने कई जरूरी उत्पादों की थोक दरें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि जिस पेन की खुदरा बिक्री 10 रुपये है, उसकी खरीद लागत बढ़कर 12 रुपये तक पहुंच गई है।
इसके बावजूद ग्राहकों को जोड़े रखने की मजबूरी में दुकानदार खुदरा में 10 रुपये ही वसूल रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि 10 रुपये के उत्पाद पर दो रुपये तक खरीद लागत बढ़ना छोटे दुकानदारों के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान है। यह अंतर सीधे उनकी कमाई को खत्म कर रहा है। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि कच्चे तेल के दामों में तेजी का यह रुख बना रहा, तो आने वाले दिनों में कंपनियां कॉपी, रबर, पेंसिल और शार्पनर जैसी अन्य स्टेशनरी सामग्री की कीमतें और बढ़ा सकती हैं। ऐसे में खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ना तय माना जा रहा है। ब्यूरो