धर्मशाला। सोमवार को जिला कांगड़ा में बादल फटने से नहीं बल्कि लोगों के लालच ने तबाही के मंजर को अंजाम दिया। लोगों की ओर से खड्डों और नालों पर किए गए अवैध कब्जों ने पानी का बहाव इस कद्र मोड़ा कि कई मकानों, दुकानों और पुलों के साथ कूहलों का भी सफाया कर दिया। मांझी खड्ड में मात्र दो किलोमीटर के दायरे में ही एक पुल पूरी तरह से बह गया जबकि दो पुल क्षतिग्रस्त हो गए। जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह सवा सात और साढ़े सात बजे के आसपास मांझी, चरान, गज, मनूणी, बनेर व इक्कू खड्डों सहित छोटे-बड़े नालों ने रुद्र रूप धारण किया। इन खड्डों-नालों में पानी इतना अधिक था कि कई लोग बेघर हो गए। वहीं कई लोगों से रोजगार छीन लिया तो कई लोगों का संपर्क ही कट गया। सूत्रों की मानें तो सोमवार को जिला में मची तबाही कोई बादल फटने की घटना से पेश नहीं आई बल्कि लोगों के लालच में आकर नालों और खड्डों में किए गए अवैध निर्माण के चलते पेश आई है। खड्डों-नालों पर हुए अवैध कब्जों ने पानी गुजरने के सभी रास्तों को बंद कर दिए हैं, जिसके चलते तेज बहाव के साथ आए पानी ने अपना रास्ता खुद ही बनाया। इस दौरान पानी ने ऐसे-ऐसे स्थानों पर पहुंच कर कहर बरपाया है, जहां पर खड्डों के पानी से नुकसान होना पूरी तरह से असंभव था।
अवैध कब्जों के कारण ऐसे मची तबाही
जानकारी के अनुसार भागसूनाग में बह रहे नाले पर लोगों ने पूरी तरह से कब्जा किया है। यह कब्जा इस कद्र हावी है कि बारिश का पानी नाले से न होकर सड़क पर बहता नजर आया। इसके अलावा ग्राम पंचायत शीला भटेहड़ में एक व्यक्ति की ओर से मांझी खड्ड में लगाए गए कंकरीट के डंगे के कारण मांझी खड्ड का रुख ही बदल गया और पानी खड्ड से करीब 100 मीटर दूर राजकीय प्राथमिक पाठशाला पासू में जा घुसा। इसके अलावा चैतड़ू में भी मांझी खड्ड किनारे ही दुकानों और मकानों का निर्माण किया गया, जिसके चलते नुकसान हुआ है।
अभी तक यह कहना संभव नहीं है कि जिला में बादल फटा है लेकिन लोगों की ओर से किए गए अवैध कब्जों के कारण जिला में ज्यादा नुकसान हुआ है।
-डा. निपुण जिंदल, जिलाधीश, कांगड़ा,