धर्मशाला। 12 जुलाई के बाद से मंदी की मार झेल रहे होटल कारोबार को इस वीकेंड पर भी कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज-भागसूनाग के हाटेलों में ऑक्यूपेंसी इस सप्ताह पांच फीसदी से भी नीचे आ गई है।
इस कारण होटल कारोबारियों पर और आर्थिक मार पड़ना तय है। लगातार आर्थिक मंदी झेल रहे होटल कारोबार का बुरा असर अब होटलों में सेवाएं देने वाले लोगों पर भी पड़ने लगा है।
अब तक मैक्लोडगंज और भागसूनाग में चल रहे होटलों में से 75 फीसदी कर्मचारियों को रोजगार से हाथ धोने पड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो आने वाले दिनों में कई और लोगों की रोजी-रोटी भी छिन सकती है। मैक्लोडगंज के होटल कारोबारी डॉ. विशाल नैहरिया ने बताया कि इस वीकेंड पर होटलों में ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी भी नहीं पहुंच पाई है। कुछेक होटलों में एक-दो कमरे ही बुक हो पाए हैं। बाकी होटलों का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से प्रदेश में घूमने आने वाले पर्यटकों को कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट साथ लाने की अनिवार्यता ने पर्यटन क्षेत्र पर विपरीत असर डाला है। उन्होंने बताया कि कम संख्या में पर्यटक आने से होटल कारोबारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। होटल मालिकों को कर्ज की किस्तें तक लौटाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि होटल कारोबारियों को राहत देते हुए बिजली के बिल माफ करने के साथ-साथ कर्ज पर ब्याज को माफ करना चाहिए, ताकि होटल कारोबारी हालात सामान्य होने पर पर्यटकों को सेवाएं दे सकें।