जसूर (कांगड़ा)। प्रदेश मार्केट कमेटी बोर्ड एपीएमसी एक्ट के तहत मार्केट फीस को लेकर प्रदेश सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें प्रदेश सरकार की ओर से 132 के बजाय 259 वस्तुओं पर मार्केट फीस वसूली जाएगी।
नई सूची जारी करने पर नूरपुर क्षेत्र के किराना व्यापारियों में खासा रोष है। इनके अनुसार अन्य प्रदेशों में कुछ वस्तुओं की मंडी या मार्केट यार्ड के अंदर बिकने वाली वस्तुओं पर मार्केट फीस लगती थी। वहीं, प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश को मार्केट यार्ड घोषित करते हुए सभी मार्केट से फीस चार्ज करने की अधिसूचना जारी की है।
एपीएमसी एक्ट के प्रावधान के अनुसार प्रत्येक किराना कारोबारी जिसकी सेल 1000 प्रतिदिन है और सालाना तीन लाख साठ हजार है, उसे एक फीसदी मार्केट फीस देनी पड़ेगी। इसके अलावा उसे 25 हजार रुपये की एफडी बतौर सिक्योरिटी भी मार्केट कमेटी बोर्ड के पास गिरवी रखनी होगी। वहीं, जिन व्यापारियों के पास लाइसेंस नहीं हैं, उन्हें दोगनी मार्केट फीस चुकानी पड़ेगी। इस पर व्यापारियों नितिन महाजन, नंदू शर्मा, शशि शर्मा, संजीव महाजन, कूकू शर्मा, राम कुमार, कालू वर्मा आदि ने सरकार के खिलाफ रोष जताया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन और मल्टी स्टोर खोलने से एक तरफ व्यापारियों के कारोबार में काफी कमी आई है। वहीं, डमटाल व्यापार मंडल के प्रधान राजकुमार गुप्ता और जसूर व्यापार मंडल के कार्यकारी प्रधान राजू महाजन ने कहा कि सरकार एक ही वस्तु पर तीन अलग-अलग प्रकार से टैक्स लगा रही है। उन्होंने कहा कि जौ, चावल और चिड़वे पर अलग-अलग मार्केट फीस लगाई जा रही है। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि कंडवाल बैरियर पर मनमाने ढंग से फीस उगाई जा रही है। इन व्यापारिक संगठनों का कहना है कि प्रदेश का पूरा व्यापार मंडल इस अधिसूचना का पूर्ण रूप से विरोध करेगा।
कोट्स
-सरकार इस तुगलकी फरमान को वापस ले। आम किराना व्यापारी और छोटा व्यापारी इससे ज्यादा प्रभावित होगा। प्रदेश का समस्त व्यापार मंडल सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करेगा। आम जनहित को ध्यान में रखकर इसे सरकार को वापिस लेना चाहिए।
-सोमेश शर्मा, प्रधान व्यापार मंडल हिमाचल प्रदेश