फतेहपुर (कांगड़ा)। दो माह के मत्स्य आखेट प्रतिबंध के बाद पौंग झील में एक बार फिर किश्तियों की रौनक लौट आई है। इस बार सबसे बड़ी राहत राज्य मछली ''गोल्डन महाशीर'' (सुनहरी महाशीर) के उत्पादन पर मिली है। कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 1.5 प्रतिशत से बढ़कर इस वर्ष 3.6 प्रतिशत पहुंच गई है। दुर्लभ प्रजाति के उत्पादन में दोगुने से अधिक की यह बढ़ोतरी इसके संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। पहले दिन सिंघाड़ा मछली की सर्वाधिक आवक रही। रोहू, कतला और महाशीर की भी अन्य मंडियों में भारी मांग देखी जा रही है।
दूसरे दिन 9.12 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया। 15 मत्स्य सहकारी सभाओं से जुड़े करीब 2,500 मछुआरे झील में उतर गए हैं। मत्स्य एकत्रीकरण केंद्रों पर आवक शुरू होने के साथ ही पंजाब, दिल्ली, जम्मू और चंडीगढ़ की मंडियों में ताजा मछली की सप्लाई शुरू हो गई है।
सहायक निदेशक मत्स्य संदीप कुमार ने मछुआरों से निर्धारित आकार के जाल का उपयोग करने और छोटी मछलियों का शिकार न करने की अपील की है ताकि उत्पादन के साथ दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
अवैध शिकार से 2.02 लाख रुपये जुर्माना वसूला
दो माह के प्रतिबंध के दौरान मत्स्य विभाग ने अवैध शिकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 195 मामले दर्ज किए और उल्लंघनकर्ताओं से 2,02,100 रुपये जुर्माना वसूला। इसके अलावा अवैध रूप से पकड़ी गई मछलियों की नीलामी से लगभग 6,500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।