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बिना मुआवजा दो माह में परिसर खाली करने के नोटिस जारी

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जसूर (कांगड़ा)। फोरलेन परियोजना प्रभावितों की नोटिस मिलने से नींद उड़ गई है। कुछ प्रभावितों को मुआवजा राशि के साथ नोटिस थमाए जा रहे हैं कि अपने परिसरों को दो माह के भीतर खाली कर दें। इतना ही नहीं, प्रभावितों को अपने भवनों को गिराना होगा और मलबे को भी खुद ठिकाने लगाना पड़ेगा। अगर विभाग इस काम को करने पर बाध्य होता है, तो भवन मालिक को हर्जाना भी चुकाना पड़ेगा। कई प्रभावितों को बिना मुआवजा दो माह में परिसर खाली करने के नोटिस जारी हुए हैं। इससे कंडवाल से सिंयूनी तक के करीब चार दर्जन कस्बों के प्रभावितों में हड़कंप मच गया है।
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नियमों के अनुसार जब तक मुआवजा संबंधित भवन मालिक के बैंक खाते में नहीं डाला जाता, तब तक भवन को खाली करने का नोटिस जारी नहीं किया जा सकता।
फोरलेन मानवाधिकार लोक बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने बताया कि मुआवजा प्रदान किए बिना भवन खाली करने के नोटिस जारी करना अनुचित व गैरकानूनी है। कंडवाल स्थित शान होटल समेत कुछ भवन मालिकों को बिना मुआवजा ही प्रशासन ने नोटिस जारी कर दिए हैं। इससे इन लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन इस बात पर संज्ञान ले।
-----कोट्स----
फोरलेन प्रभवितों के प्रति सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण : महाजन
नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन ने बताया कि फोरलेन प्रभावितों के प्रति सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण है। हजारों प्रभावितों को मनमर्जी का मुआवजा थमाया जा रहा है। लोगों की बहुमूल्य जमीन व भवनों को नाममात्र मुआवजा देकर हड़पा जा रहा है। जनप्रतिनिधि लोगों के हितों की रक्षा करने में नाकाम साबित हुए हैं।
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तकनीकी कारणों से मुआवजा राशि खातों में नहीं पड़ी : अनिल
नूरपुर के एसडीएम अनिल भारद्वाज ने बताया कि मुआवजा राशि संबंधित लोगों के खाते में डाल दी गई है। तकनीकी कारणों से कुछ लोगों के बैंक खातों में राशि नहीं पड़ी है। इस संबंध में बैंकों से बात की जा रही है।
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