पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पशु चिकित्सा फार्मोकोलॉजी एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने तीन दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान मुख्यातिथि कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से कहा कि विषाक्त पौधों के खाने के बाद दुधारू पशुओं के उत्पादों और अन्य पशुओं पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ता है। इस बारे में विशेषज्ञों की ओर से शोध कर व्यापक निष्कर्ष सामने लाए जाने चाहिए।
प्रदेश के विभिन्न भागों में पाए जाने वाले विषाक्त पौधों का प्रभाव अलग-अलग रहता है। लिहाजा, अधिकारियों को चाहिए कि विवि के विशेषज्ञों के संपर्क में रहते हुए उन पौधों की जानकारी देने के साथ पशुधन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी समय-समय पर उन्हें अवगत करवाते रहें। कृषि विश्वविद्यालय में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए समय-समय पर इस प्रकार से प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसमें उसके निदान के बारे में बताया जाता है। महाविद्यालय के डीन एवं पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. आर कुमार ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न भागों में संस्थान द्वारा, जो विशेष शिविर लगाए जाते है तो पशुपालकों की ओर से विभिन्न समस्याओं के बारे में बताया जाता है। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पल्लवी भारद्वाज ने बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. प्रशांत, डॉ. मनीष और डॉ. राधिका ने भी अपने विचार व्यक्त किए।