धर्मशाला। तकनीकी शिक्षा विभाग में पदोन्नति को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि वर्ष 2018 में सीधे भर्ती हुए ग्रुप इंस्ट्रक्टर्स को वरिष्ठ कर्मचारियों की अनदेखी करते हुए प्रधानाचार्य पद पर प्रमोट कर दिया गया। जबकि विभाग में वर्ष 2006 से 2017 के बीच पदोन्नति कोटे से आए कई योग्य कर्मचारी पहले से इसके पात्र थे और वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित ‘इंटर-से सीनियरिटी’ सिद्धांत के अनुसार, सीधे भर्ती कर्मचारियों की वरिष्ठता केवल उनके अपने कोटे तक सीमित रहती है। वे पदोन्नति कोटे के वरिष्ठ कर्मचारियों से ऊपर नहीं जा सकते। इसके बावजूद विभाग ने रोस्टर और कोटा प्रणाली को दरकिनार कर सीधे भर्ती ग्रुप इंस्ट्रक्टर्स को समय से पहले प्रमोशन का लाभ दे दिया।
पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेशों के अनुपालन में विभाग ने बीते 8 अप्रैल 2026 को संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की थी। इस नई सूची में उन कर्मचारियों की रैंक काफी नीचे चली गई है, जिन्हें पहले नियमों के विपरीत जाकर गलत लाभ दिया गया था। कर्मचारियों ने कहा है कि वरिष्ठ कर्मियों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।