यौन शोषण की शिकार प्रशिक्षु डॉक्टर ने मांगा न्याय
टीएमसी के प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई न होने पर राज्यपाल को दोबारा लिखा पत्र
आरोप, टीएमसी प्रशासन ने शिकायत के दो महीने बाद भी नहीं की कार्रवाई
सुनील चड्ढा
धर्मशाला। अपने ही विभागाध्यक्ष पर मानसिक और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली टांडा मेडिकल कॉलेज के एक विभाग की पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) की छात्रा ने न्याय नहीं मिलने पर दूसरी बार राज्यपाल को शिकायत पत्र लिखा है। 22 अगस्त को राज्यपाल को लिखे शिकायत पत्र में पीजी छात्रा ने आरोप लगाया है कि टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उसकी शिकायत पर विभागाध्यक्ष के खिलाफ दो महीने बाद भी कार्रवाई नहीं की।
छात्रा ने आरोप लगाया है कि उसके साथ मानसिक और यौन शोषण के मामले की जांच करने वाली टांडा मेडिकल कॉलेज की इंटरनल कंप्लेट कमेटी ने आरोपी प्रोफेसर पर कार्रवाई करने के बजाय उसको बचाने की कोशिश की है। पीजी की छात्रा ने पत्र में लिखा है कि उसने 30 जून 2018 को अपने विभागाध्यक्ष की ओर से उसका मानसिक और यौन शोषण करने की शिकायत टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को दी। प्राचार्य ने मामले की जांच के लिए शिकायत टांडा मेडिकल कॉलेज की इंटरनल कंप्लेट कमेटी को भेजी। जांच करने के बाद आंतरिक शिकायत समिति ने रिपोर्ट प्राचार्य को भेज दी। कमेटी की जांच रिपोर्ट में आरोपी विभागाध्यक्ष के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने की सिफारिश तक नहीं की गई। जांच रिपोर्ट का प्रमुख हिस्सा आरोपी विभागाध्यक्ष के पक्ष में लिखा गया। छात्रा ने लिखा है कि आरोपी विभागाध्यक्ष उसके थीसिस के गाइड और एचओडी हैं। ऐसे में उसे थीसिस पूरे करने में परेशानी पेश आ रही है। छात्रा का कहना है कि शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के बदले उसे और ज्यादा मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
उधर, राज्यपाल को पहली बार लिखे खत पर राजभवन ने 7 सितंबर को टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। अब असंतुष्ट छात्रा ने फिर से राज्यपाल को पत्र लिखा है। टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भानू अवस्थी ने बताया कि छात्रा से बात करके यह मामला सुलझा लिया गया है। राज्यपाल के सचिव अरुण शर्मा ने कहा कि मामले को लेकर राजभवन की ओर से सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।