अमर उजाला ब्यूरो
इंदौरा/डमटाल(कांगड़ा)। इंदौरा के मंड क्षेत्र में स्थापित क्रशर और बसंतपुर पंचायत के लोगों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को क्रशर संचालक और गांववासियों में समझौता करवाने पहुंचे प्रशासन को खाली हाथ लौटना पड़ा।
प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ग्रामीणों नारेबाजी कर क्रशर की गाड़ियों को गांव के बीच से न निकलने की जिद पर अड़े रहे। नूरपुर के एसडीएम आबिद हुसैन सादिक विवाद को सुलझाने के लिए बसंतपुर पंचायत के गांव त्यौड़ा पंचायत घर में पहुंचे थे, लेकिन एसडीएम के हस्तक्षेप के बावजूद ग्रामीणों और क्रशर मालिकों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। इस दौरान बसंतपुर पंचायत की प्रधान आशु देवी, उपप्रधान जोगिंद्र सिंह, बीडीसी सदस्य कृष्णा देवी, सदस्य सपना देवी, शामूदीन, राम लाल, देस राज, गोविंद सिंह, मेहर सिंह, सरूप, ओम प्रकाश, रशपाल सिंह, बनारसी दास, मोहिंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, पूर्व प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि प्रशासन ने गांववासियों की बात को अनदेखा कर क्रशर मालिकों की बात को सुना और बातचीत के दौरान गांव में पहुंचा प्रशासन भी ग्रामीणों के ऊपर दबाव बनाता नजर आया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने बातचीत से किनारा कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और क्रशर की गाड़ियों को न निकलने देने की जिद पर अड़े रहे। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर क्रशर की गाड़ियों को गांव से नहीं निकलने देंगे। इस अवसर पर इंदौरा के नायब तहसीलदार सुशील कुमार, लोनिवि के सहायक अभियंता रूप लाल, इंदौरा पुलिस थाना के अतिरिक्त प्रभारी सुभाष राणा सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।
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ग्रामीणों के आरोप
लोगों का आरोप है कि मंड क्षेत्र अवैध खनन से त्रस्त है। इससे उनकी उपजाऊ भूमि बंजर हो चुकी है और पेयजल स्रोत सूख गए हैं। उन्होंने प्रदेेश सरकार से मांग की है इन सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर ही क्रशर चलाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
नियमानुसार होगी कार्रवाई
नूरपुर के एसडीएम नूरपुर आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि दोनों पक्षों को सुना गया है, लेकिन बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने हो हल्ला करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथों में नहीं लेने दिया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया में जो भी उचित होगा नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जल्द समस्या का हल निकाले प्रशासन
इस संबंध में क्रशर मालिकों की कहना है कि क्रशर लगाने के लिए सभी मापदंडों और औपचारिकताओं को पूरा किया गया है। सभी विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने और लाखों रुपये टैक्स क्रशर चलाने से पहले ही सरकारी खजाने में जमा करवाया गया है। बावजूद इसके उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन इस मसले का कोई हल निकाले अन्यथा उनके करोड़ों के नुकसान की भरपाई की जाए।