नूरपुर (कांगड़ा)। ढाई साल पहले भवन बनने के बाद भी मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) नूरपुर के संचालन का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। भले ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अस्पताल के अधूरे पड़े कार्यों के लिए 1.59 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है, लेकिन इसके संचालन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचे को जुटाने के लिए अभी भी 3.18 करोड़ रुपये के बजट की दरकार है। करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बहुमंजिला भवन में बिजली और पानी के कनेक्शन के अलावा सीवरेज का काम शेष है, जबकि अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए जरूरी साजोसामान के अलावा सबसे अहम स्टाफ की नियुक्ति अभी दूर की कौड़ी हैं।
हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दौरे से पहले दिसंबर में स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने इसके लिए बजट जारी करने की घोषणा की थी। लेकिन, शेष बकाया बजट राशि जारी होने में अभी और कितना इंतजार करना पड़ेगा, यह कहना मुश्किल है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन वन मंत्री राकेश पठानिया ने 8 अक्तूबर, 2022 को मातृ-शिशु अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन किया था। लेकिन, आज तक इसका संचालन नहीं हो पाया।
मातृ-शिशु अस्पताल नूरपुर के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 1.59 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। शेष अतिरिक्त बजट के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है। उम्मीद है कि शेष बजट भी जल्द उपलब्ध हो जाएगा।
डॉ. विवेक वन्याल, एमएस, नूरपुर सिविल अस्पताल
वर्तमान में नूरपुर अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए मजबूरन टांडा या पठानकोट के प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यह चिंता का विषय है।
प्रमोद महाजन, प्रधान, नूरपुर सुधार सभा
नूरपुर में प्रस्तावित मातृ-शिशु अस्पताल का संचालन बीते ढाई साल से अधर में अटका हुआ हैं, इसके जल्द संचालन से नूरपुर समेत आसपास के क्षेत्र के लोगों को भी सहूलियत होगी।
राजकुमार शर्मा, स्थानीय निवासी
मातृ-शिशु अस्पताल के संचालन से नूरपुर सहित इंदौरा, जवाली, फतेहपुर और भटियात क्षेत्र की जनता को भी लाभ मिलेगा। प्रदेश सरकार को अस्पताल के जल्द संचालन के लिए बुनियादी ढांचा जुटाना चाहिए।
रजनी महाजन, उपाध्यक्ष, नगर परिषद नूरपुर