ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल ज्वालामुखी में एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन तीन माह से खराब पड़ी है। यही नही, रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ भी नहीं है। यहा तैनात रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति डेपुटेशन पर कहीं दूसरी जगह कर दी गई है।
अब मशीन वाले कमरे पर ताला लटका हुआ है। ज्वालामुखी अस्पताल में उपचार करवाने आने वाले मरीजों को अब निजी लैब में ही 700 से 1000 रुपये का महंगा अल्ट्रसाउंड करवाना पड़ रहा है, जबकि ज्वालामुखी सिविल अस्पताल में यह सुविधा फ्री थी। अल्ट्रासाउंड मशीन इससे पहले भी 10 माह तक खराब पड़ी हुई थी। इसे कई संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल को अवगत करवाकर ठीक करवाया था। इस मशीन को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने साढ़े तीन लाख रुपये खर्च किए थे।
उसके बाद मशीन चालू हुई और चार माह चली। अब फिर से मशीन खराब पड़ी है। बताया जा रहा है कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया था, तो समिति ने मंदिर ट्रस्ट ज्वालामुखी से नई अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग रखी थी। इसे जल्द पूरा करने के आदेश दिए गए थे। ज्वालामुखी अस्पताल में 70 हजार की आबादी और चंगर क्षेत्र खुंडियां मझीन की लगभग 27 पंचायतों के मरीज और गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आते हैं। कई मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है, लेकिन अस्पताल में सुविधा न मिलने के कारण उन्हें बस या ऑटो से अन्य प्राइवेट संस्थानों का रुख करना पड़ता है और हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अपराध नियंत्रण एवं अनुसंधान केंद्र ज्वालामुखी इकाई अध्यक्ष परीक्षित शर्मा, सौरभ शर्मा, राहुल शर्मा, अशोक कुमार, आशुतोष आदि ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस मशीन को ठीक किया जाए या नई मशीन खरीदी जाए, ताकि मरीजों को सुविधा मिल सके।
उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा दिया है : डॉ. पवन
खंड चिकित्सा अधिकारी ज्वालामुखी डॉ. पवन कुमार का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से कमरे पर ताला लगा है। पुरानी मशीन ठीक नहीं है और न ही कोई इसे चलाने वाला विशेषज्ञ है। उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया गया है और मंदिर न्यास से भी नई मशीन की मांग की गई है, लेकिन जब तक डॉक्टर उपलब्ध नहीं होता, तब तक मशीन नई नहीं ली जा सकती। अब नए बैच में डॉक्टरों की भर्ती होगी। तब फिर से सुविधा शुरू की जाएगी।