पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश राजपूत महासभा की वर्चुअल बैठक में सर्वसम्मति से मांग उठाई गई कि बोर्ड में समाज के सक्रिय, निष्पक्ष और योग्य प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। चिंता व्यक्त की गई कि गठित किए गए बोर्ड में विधायकों की ओर से नामित सदस्यों में अधिकांश ऐसे व्यक्ति हैं जो न तो जिला या प्रदेश स्तर की राजपूत सभाओं की कार्यकारिणी के सदस्य हैं और न ही आम सदस्य। कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्र की राजपूत सभाओं के पदाधिकारियों को नजरअंदाज कर समाज को एकजुट करने की बजाय विभाजनकारी नीति अपनाई है। महासभा ने सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश राजपूत महासभा की ओर से प्रेषित सूची में शामिल पदाधिकारियों को बोर्ड में स्थान दिया जाए। बैठक में संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को जोड़ने और समाज के उत्थान हेतु सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन पर भी विचार-विमर्श किया गया। निर्णय लिया गया कि दिसंबर में जिला हमीरपुर में दस हजार से अधिक प्रतिभागियों के साथ भव्य राजपूत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सरयाल ने कहा कि राजपूत महासभा का प्रमुख उद्देश्य समाज की एकता, शिक्षा, सम्मान और पहचान को सुदृढ़ करना है। महासचिव विजय चंदेल ने सभी उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद करते हुए बैठक का समापन किया।
महासभा के अध्यक्ष इंजीनियर केएस जंवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति कृषि विवि पालमपुर प्रो. अशोक सरयाल, महासचिव विजय चंदेल तथा पूर्व सैनिक विंग के अध्यक्ष एवं पूर्व चेयरमैन हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग मेजर जनरल धर्मवीर सिंह राणा ने कहा कि बैठक का मुख्य एजेंडा राजपूत कल्याण बोर्ड के गठन और उसमें सरकार की ओर से नामित किए जाने वाले सदस्यों पर विस्तृत चर्चा रहा। सभी पदाधिकारियों ने आठ साल से लंबित पड़े इस बोर्ड के गठन पर प्रसन्नता व्यक्त की और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार प्रकट किया।