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कृषि वैज्ञानिक शोध कार्यों को किसानों के खेतों तक ले जाएं: कंवर

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कृषि विवि पालमपुर में किसानों को सम्मानित करते कृषि मंत्री - फोटो : Kangra
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पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि विवि पालमपुर में राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला और किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कवंर ने बतौर मुख्यातिथि भाग लिया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को पूर्ण आर्थिकी के साथ एकीकृत कृषि मॉडल विकसित करने के लिए कहा, ताकि किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इस तरह के मॉडलों को अपना सकें। उन्होंने कहा कि अस्सी प्रतिशत बीज बाहर से खरीदा जाता है, इसलिए राज्य के भीतर प्रगतिशील किसानों की भागीदारी के साथ प्रमुख फसलों के बीज पैदा करने की भी आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बीज संरक्षण योजना के तहत पारंपरिक फसलों के बीजों के संरक्षण के प्रयास जारी हैं। प्रदेश में कीटनाशक अवशेष सबसे अधिक हैं। कहा कि कृषि रसायन केवल पंजीकृत दुकानों पर ही उपलब्ध हों और किसानों के खेतों में रसायनों के अत्यधिक उपयोग को रोकने के लिए उन्हें सही रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। मंत्री ने वैज्ञानिकों से राज्य के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए फसलों का सुझाव देने को कहा। उन्होंने जिला स्तर पर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों को और अधिक जीवंत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विवि के कुलपति प्रो. हरींद्र कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान और प्रसार उपलब्धियों का विवरण दिया। कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों ने गेहूं तथा माश (उड़द) के बीज पैदा करने का काम शुरू कर दिया है। कृषि निदेशक डॉ. एनके धीमान ने कहा कि उत्पादन लागत को कम करने पर शोध कार्य किया जाना चाहिए और प्राकृतिक खेती इसका एक अच्छा विकल्प है।
ये प्रगतिशील किसान हुए सम्मानित
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने विश्वविद्यालय संग्रहालय में कृषि दीर्घा-2 का उद्घाटन किया और 19 कृषि दूतों और पांच राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें लाल चावल किस्म संरक्षण के पुरस्कार विजेता भी शामिल रहे। इनमें बिचित्र सिंह, सुनील कुमार, मंगल सिंह, अमीश, गोविंद सिंह, अवनीत कुमार, नंदू राम, निशांत गाज्टा, प्रदीप नेगी सुदर्शना देवी, मधु कुमारी, अनीता नेगी, विविध शर्मा, विशाल पाठक, तरण सिंह, भवानी दत्त, प्रमोद सिंह, निम्मो देवी, कुंदन लाल, माया देवी, वर्षा शर्मा, देना मेहता, लीलावती, सुनीता देवी शामिल रहे। इस मौके पर प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सतीश पाल, डॉ. सुरेश गौतम, डॉ. देशराज चौधरी और प्रसार शिक्षा सह निदेशक डॉ. डेजी बसंदराय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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