बकाया किराये की वसूली को कोर्ट जाएगी ज्वालामुखी नगर परिषद
नप ने शुरू की डिफाल्टर दुकानदारों पर कार्रवाई की तैयारी
कई दुकानदार वर्षों से नहीं दे रहे किराया, हर साल बढ़ रहा राजस्व घाटा
अमर उजाला ब्यूरो
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी नगर परिषद ने दुकानों का किराया न देकर कारोबार कर रहे दुकानदारों से बकाया राशि की वसूली और दुकानों को खाली करवाने के लिए न्यायालय में जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक ज्वालामुखी कस्बे के दर्जनों दुकानदार काफी अरसे से नप की दुकानों में कारोबार तो कर रहे हैं, लेकिन नगर परिषद को तय किराया नहीं दे रहे हैं। इससे नगर परिषद को हर वर्ष राजस्व में घाटा उठाना पड़ रहा है। इस घाटे से उबरने के लिए नगर परिषद ज्वालामुखी ने अब न्यायालय का रास्ता अपनाने का मन बना लिया है। इसके लिए नप ने शहर के डिफाल्टर दुकानदारों की सूची तैयार कर ली है, जिन्होंने वर्षों से दुकानों का किराया नहीं दिया है और दुकान पर कब्जा भी जमा रखा है। ऐसे दुकानदारों पर अब सख्ती से निपटा जाएगा।
गौरतलब है कि ज्वालामुखी कस्बे के दर्जनों दुकानदारों का अनुमानित बकाया किराया करीब 15 लाख रुपये से ज्यादा है, ऐसे में नगर परिषद को हर वर्ष पड़ रहे घाटे और दुकानों पर कब्जे को छुड़वाने के लिए अंतिम प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है, क्योंकि नगर परिषद ने पहले भी कई बार नोटिस भेज कर रिकवरी के भरपूर प्रयास किए, लेकिन दुकानदारों ने किराया जमा नहीं करवाया है। वहीं इस संदर्भ में नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी देशराज चौधरी का कहना है कि ज्वालामुखी के डिफाल्टर दुकानदारों से रिकवरी और कब्जे छुड़ाने के लिए न्यायालय का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसके लिए समस्त औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।