पहले इस कार्निवल का आयोजन जिला प्रशासन अपने स्तर पर करता था, जिससे अक्सर बजट की किल्लत रहती थी। आयोजन की तारीखें भी (सितंबर से नवंबर के बीच) बदलती रहती थीं। सरकारी दर्जा मिलने से अब आयोजन के लिए बजट की कोई कमी नहीं होगी। यह कार्निवल अब प्रदेश सरकार के वार्षिक कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बन गया है। कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि सरकारी अधिसूचना जारी हो चुकी है। चूंकि आयोजन 24 से 31 दिसंबर तक होगा, इसलिए क्रिसमस और नववर्ष पर आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक बड़ा आकर्षण होगा। इससे स्थानीय पर्यटन कारोबार और व्यापार को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।