कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (केसीसीबी) प्रबंधन ने अपने तीन बैंक प्रबंधकों को संचालन क्षेत्र से बाहर ऋण आवंटित करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बैंक प्रबंधन ने शाखा प्रबंधकों से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि उन्होंने अपनी शाखाओं के व्यावसायिक संचालन क्षेत्र से बाहर लगभग 1,304 लाभार्थियों को ऋण क्यों आवंटित किए। प्रबंधन ने कहा कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या उन्हें बर्खास्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला तब सामने आया जब राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के ऋण खातों का ऑडिट किया। ऑडिट में पाया गया कि कुछ शाखा प्रबंधकों ने बैंक के संचालन क्षेत्र से बाहर के व्यक्तियों को भी ऋण दिए थे। केसीसीबी का संचालन क्षेत्र मुख्य रूप से हिमाचल के पांच जिलों कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति तक सीमित है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के अनुसार, बैंक इन जिलों के बाहर कोई वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकता है। आरोप है कि प्रबंधकों ने अपने दायरे से बाहर मंडी, बिलासपुर और पंजाब में भी लोगों को ऋण बांटे हैं। संचालन क्षेत्र से बाहर ऋण आवंटित करने के कारण न केवल नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि ऋण की वसूली में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शाखा प्रबंधकों की इस लापरवाही के चलते आरबीआई ने केसीसीबी पर लगभग 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बैंकों को हुए वित्तीय नुकसान के बाद अब शाखा प्रबंधकों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।