किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद की विचारधारा या धर्म अपनाने का सांविधानिक अधिकार: कंंगना
कहा कि फिल्म जगत में उन्होंने कई ऐसी हिंदू महिलाओं को करीब से देखा है, जो शुरुआत में किसी खास राजनीतिक या धार्मिक विचारधारा से नहीं जुड़ी थीं। बाद में शादी या दोस्ती के जरिये कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद की विचारधारा या धर्म अपनाने का सांविधानिक अधिकार है। इसमें कोई बुराई नहीं है। अकसर उन्हें तंज सुनने को मिलता है कि वह कब से संघी बन गईं।
हिंदू बेटियों को अकसर अपने अतीत की अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है: कंगना
कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पसंद की विचारधारा बदल सकता है तो उन्हें भी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रेरित जागरूक हिंदू बनने का अधिकार है। उन्होंने इसे समाज का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि हिंदू बेटियों को अकसर अपने अतीत की अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है, जबकि दूसरों के साथ ऐसा नहीं होता। कंगना ने कहा कि समाज को यह स्वीकार करना चाहिए कि समय के साथ व्यक्ति के विचार बदल सकते हैं। जैसे दूसरे लोगों को अपनी वैचारिक पहचान चुनने की स्वतंत्रता है, वैसे ही हिंदू बेटियों को भी बिना पूर्वाग्रह के पसंद का रास्ता चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।